भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 421 में से

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पृष्ठ 328

उत्तरार्ध सत्ताईसवां अध्याय हे अग्नि! क्षत्रियों को आप अपनी आयु व उन्हें अपना वैभव प्रदान कीजिए. मित्र देव के साथ रह कर रचनात्मक कार्य करने का यत्न कीजिए. आप सजातियों के बीच रहने की कृपा कीजिए. आप राजा हैं. आप आइए. आप यज्ञ में प्रज्वलित होने की कृपा कीजिए. (५) अति निहो अति स्रिधोत्यचित्तिमत्यरातिमग्ने. विश्वा ह्यग्ने दुरिता सहस्वाथास्मभ्य १४ सहवीरा १४ रयिं दाः.. (६) हे अग्नि! हत्यारों, अत्याचारियों, स्वेच्छाचारियों, शत्रुओं को साहस के साथ दूर करने की कृपा कीजिए. आप हमें वीर पुत्रों के साथसाथ धन भी प्रदान करने की कृपा कीजिए. (६) अनाधृष्यो जातवेदा ऽ अनिष्टृतो विराज्दग्ने क्षत्रभृद्दीदिहीह. विश्वा ऽ आशाः प्रमुञ्चन्मानुषीर्भियः शिवेभिरद्य परि पाहि नो वृधे.. (७) हे अग्नि! आप को कोई नहीं हरा सकता. आप सब कुछ जानते हैं. आप अनश्वर, विराट्, क्षात्र धर्म के पोषक व सब की आशा हैं. आप मनुष्यों को कष्ट मुक्त कीजिए. आप हमारा आज कल्याण कीजिए. आप सब ओर से हमारी रक्षा व हमारी बढ़ोत्तरी करने की कृपा कीजिए. (७) बृहस्पते सवितर्बोधयैन १४ स १४ शितं चित्सन्तरा १४ स १४ शिशाधि. वर्धयैनं महते सौभगाय विश्व ऽ एनमनु मदन्तु देवाः.. (८) हे बृहस्पति व सविता देव! आप इन यजमानों को बोधित व चेतना प्रदान कीजिए. आप यजमानों के सौभाग्य की बढ़ोत्तरी कीजिए. सभी देवता यजमान के अनुकूल होने व उन को आनंद प्रदान करने की कृपा करें. (८) अमुत्रभूयादध यद्यमस्य बृहस्पते अभिशस्तेरमुञ्चः. प्रत्यौहतामश्विना मृत्युमस्माद्देवानामग्ने भिषजा शचीभिः.. (९) हे बृहस्पति देव! आप हमें यमराज के घर जाने के डर से मुक्त कीजिए. अश्विनी देव हमारे मृत्यु के भय को दूर करने की कृपा करें. अश्विनी देव ओषधियों के ज्ञाता हैं. वे अग्नि को पवित्र बनाने की कृपा करें. (९) उद्वयं तमस्परि स्वः पश्यन्त ऽ उत्तरम्. देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम्.. (१०) हे सूर्य! आप देवों के देव हैं. हम अंधकार से ऊपर उठें और आत्मावलोकन करें (अपनेआप को देखें). हमें उत्तरोत्तर सुख मिले. हम सविता देव व सब से उत्तम ज्योति को प्राप्त करें. (१०) ३२८ - यजुर्वेद