भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 351, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 351

उत्तरार्ध उनतीसवां अध्याय रथे॑ ति॒ष्ठन् न॑यति वा॒जिनः॑ पु॒रो यत्र॑ यत्र का॒मय॑ते सुषा॒रथिः॑.. अ॒भीशू॑नां महि॒मानं॑ पनायत॒ मनः॑ प॒श्चाद॑नु॒ यच्छ॑न्ति र॒श्मयः॑.. (४३) रथ पर बैठा हुआ अच्छा सारथी जहांजहां चाहता है, वहांवहां अश्वों को ले जाता है. लगाम की भी प्रशंसा की जानी चाहिए. वे घोड़ों के मन को अपने नियंत्रण में रखती हैं, जहां चाहती हैं, वही उन्हें ले कर जाती हैं. (४३) ती॒व्रान् घोषा॑न् कृण्वते वृषपा॒णयो॑श्वा॒ रथे॑भिः स॒ह वा॒जय॑न्तः.. अव॒क्राम॑न्तः प्रप॒दैरि॒मित्रान्॑ क्षि॒णन्ति॒ शत्रूँ १॒ र॒नप॑व्ययन्तः.. (४४) घोड़ों की लगाम जिन के हाथ में है, वे लोग तीव्र घोष करते हैं. घोड़े रथ के साथ जाते हैं. वे अपने पैरों से शत्रुओं को रौंदें. अश्व शत्रुओं का नाश करते हैं. (४४) र॒थ॒वाह॑न॒ ᳪ॒ ह॒विर॑स्य॒ नाम॒ यत्रा॑यु॒धं निहि॑तमस्य॒ वर्म॑. तत्रा॒ रथमुप॑ श॒ग्मं ᳪ॒ सदे॑म विश्वा॒हा व॒य ᳪ॒ सु॑मन॒स्यमा॑नाः.. (४५) रथ वाहन इस का नाम है, जहां आयुध रखे हैं, जहां कवच रखे हैं, अच्छे मन वाले होते हुए हम सभी इस रथ में बैठें. (४५) स्वा॒दु॒ष ᳪ॒षदः॑ पि॒तरो॑ वयो॒धाः कृ॑च्छ्रे॒श्रितः॒ शक्ती॑वन्तो गभी॒राः. चि॒त्रसे॑ना॒ ऽ इषु॑बला॒ ऽ अमृ॑ध्राः स॒तोवी॑रा॒ ऽ उ॒रवो॑ व्रातसा॒हाः.. (४६) हमारे रथ सदन में रहने वाले, पालक, आयुधारी, संरक्षी, सहनशील, शक्तिमान, गंभीर, अच्छी सेना से संपन्न व अतीव बलशाली हैं. वे संकल्पशील और शत्रुओं का मुकाबला करने वाले हैं. (४६) ब्रा॒ह्म॒णासः॑ पि॒तरः॑ सोम्या॑सः॒ शिवे॑ नो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑ने॒हसा॑. पू॒षा नः॑ पातु दुरि॒तादृ॑तावृधो॒ रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒घश॑ ᳪ॒ स ई॑शत.. (४७) ब्राह्मणगण, पितरगण, व सोमरस पीने वाले हमारी रक्षा करें. कल्याणकारी देव हमारी रक्षा करें. स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक हमें पापों से रोकें. पूषा देव हमारी रक्षा करें, अवरोधों व पापों को हम से दूर करें. कोई पापी हम पर शासन न कर पाए. (४७) सु॒प॒र्णं व॑स्ते मृ॒गो अ॑स्या॒ दन्तो॒ गोभिः॒ संन॑द्धा पतति॒ प्रसू॑ता. यत्रा॒ नरः॒ सं च॒ वि च॒ द्रव॑न्ति॒ तत्रा॒स्मभ्य॒मिष॑वः॒ शर्म॑ य ᳪ॒ सन्.. (४८) बाण अच्छा पंख धारता है. इस के दांत शत्रुओं को ढूंढ़ लेते हैं. यह शत्रुओं पर गिरता है. जहां कहीं शत्रु जाते हैं, वहां यह शत्रुओं पर गिरता है. बाण हमारे लिए अहानिकर व कल्याणकारी हों. (४८) ऋजी॑ते॒ परि॑ वृङ्धि नो॒श्मा भ॑वतु नस्त॒नूः. सोमो॒ अधि॑ ब्रवीतु नोदि॑तिः॒ शर्म॑ यच्छतु.. (४९) यजुर्वेद - ३५१

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 351, कुल 421 में से · BharatKosha