भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 378

उत्तरार्ध तैंतीसवां अध्याय उपास्मै गायत नरः पवमानायेन्दवे. अभि देवाँ २ इयक्षते.. (६२) हे यजमानो! देवताओं द्वारा चाहे गए सोमरस को तैयार कीजिए. सोमरस पवित्र है. आप उस के लिए और स्तुतियां गाइए. ( ६२ ) ये त्वाहिहत्ये मघवन्नवर्धन्ये शाम्बरे हरिवो ये गविष्टौ. ये त्वा नूनमनुमदन्ति विप्राः पिबेन्द्र सोम १४ सगणो मरुद्भिः.. (६३) हे इंद्र देव! आप धनवान व हरे रंग के घोड़े वाले हैं. मरुद्गण मेधावी हैं. उन्होंने अहि, शंबर आदि शत्रुओं के नाश के लिए आप को प्रेरित किया. गायों को छुड़ाने पर उन्होंने आप की स्तुतियां गाईं. वे सदैव आप का अनुमोदन करते हैं. हे इंद्र देव! आप विप्र हैं. आप पधारिए. आप मरुद्गण के साथ सोमरस को पीने की कृपा कीजिए. ( ६३ ) जनिष्ठा उग्रः सहसे तुराय मन्द्र ऽ ओजिष्ठो बहुलाभिमानः. अवर्धनिन्द्रं मरुतश्चिदत्र माता यद्वीरं दधनद्धनिष्ठा.. (६४) हे इंद्र देव! आप लोगों द्वारा चाहे गए हैं. आप उग्र, साहसी, बुद्धिमान, वेगवान, ओजवान व बहुत अभिमानी हैं. हे इंद्र देव! ( शत्रुनाश हेतु ) देव माता अदिति ने आप को गर्भ में धारण किया. मरुद्गणों ने निष्ठापूर्वक आप की स्तुति की है. ( ६४ ) आ तू न ऽ इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि. महान्महीभिरूतिभिः.. (६५) हे इंद्र देव! आप वृत्रासुर नाशक व संरक्षणधर्मा हैं. आप हमारे पास पधारिए. आप अपनी महान् महिमा और रक्षाओं के साथ पधारने की कृपा कीजिए. ( ६५ ) त्वमिन्द्र प्रतूर्तिष्वभि विश्वा ऽ असि स्पृधः. अशस्तिहा जनिता विश्वतूरसि त्वं तूर्य तरुष्यतः.. (६६) हे इंद्र देव! आप सभी शत्रुओं के साथ स्पर्धा करते हैं. आप दुष्टों का दलन करते हैं. आप सुख उपजाते हैं. ( ६६ ) अनु ते शुष्मं तुरयन्तमीयतुः क्षोणी शिशुं न मातरा. विश्वास्ते स्पृधः श्रथयन्त मन्यवे वृत्रं यदिन्द्र तूर्वसि.. (६७) हे इंद्र देव! जैसे मातापिता अपने शिशु को संरक्षण देते हैं वैसे ही आप हमें संरक्षण दीजिए. जब आप शत्रु से स्पर्द्धा करते हैं. तब सारी शत्रु सेना भयभीत हो जाती है. ( ६७ ) यज्ञो देवानां प्रत्येति सुम्नमादित्यासो भवता मृडयन्तः. आ वोर्वाची सुमतिर्ववृत्याद १४ होशिचद्या वरिवोवित्तरासत्.. (६८) हे यजमानो! हम देवताओं के प्रति यज्ञ करते हैं. हे आदित्य देव! आप अच्छे ३७८ - यजुर्वेद