यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 396, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध पैंतीसवां अध्याय प्रजापति देव को हम जल के पास स्थापित करते हैं. वे इस जल को धारण करने और हमें पवित्र बनाने की कृपा करें. ( ६ ) परं मृत्यो अनु परेहि पन्थां यस्ते अन्य ऽ इतरो देवयानात्. चक्षुष्मते शृण्वते ते ब्रवीमि मा नः प्रजा थ्ँ रीरिषो मोत वीरान्.. (७) मृत्यु का पथ दूसरा है. उन का पथ देवताओं के पथ से भिन्न है. आप दूसरे पथ से लौट जाने की कृपा करें. आप नेत्रवान हैं. आप श्रवण क्षमता युक्त हैं. आप से अनुरोध है कि आप हमारी प्रजा व वीरों का नाश मत कीजिए. ( ७ ) शं वातः श थ्ँ हि ते घृणिः शं ते भवन्त्विष्टकाः. शं ते भवन्त्वग्नयः पार्थिवासो मा त्वाभि शूशुचन्.. (८) वायु हमारे लिए सुखदायी हो. सूर्य हमारे लिए सुखदायी हो. इष्टिका देव हमारे लिए कल्याणदायी हो. अग्नि हमारे लिए कल्याणदायी हो. ये सभी पृथ्वी पर किसी को भी सोच एवं संताप न दें. ( ८ ) कल्पन्तां ते दिशस्तुभ्यमापः शिवतमास्तुभ्यं भवन्तु सिन्धवः. अन्तरिक्ष थ्ँ शिवं तुभ्यं कल्पन्तां ते दिशः सर्वाः.. (९) दिशाएं आप के लिए फलीभूत हों. जल आप के लिए कल्याणकारी हों. समुद्र आप के लिए कल्याणकारी हो. अंतरिक्ष आप के लिए कल्याणकारी हो. दिशाएं आप के लिए फलीभूत हों. ( ९ ) अश्मन्वती रीयते स थ्ँ रभध्वमुत्तिष्ठत प्र तरता सखायः. अत्रा जहीमोशिवा ये असञ्छिवान्वयमुत्तरेमाभि वाजान्.. (१०) पत्थर वाली नदी बह रही है. आप मित्र उस नदी को लांघने की कोशिश कीजिए. आप उठ कर उस के पार पहुंचिए. इस में जो अकल्याणकारी तत्त्व हैं, उन्हें दूर कीजिए. हम सुख और कल्याणदायी पदार्थ इस नदी से पाएं. ( १० ) अपाघमप किल्बिषमप कृत्यामपो रपः. अपामार्ग त्वमस्मदप दुःष्वप्न्य थ्ँ सुव.. (११) हटाइए, पाप को दूर हटाइए. आप हमारे पाप कर्मों को दूर हटाइए. अपयशदायी कर्मों को आप हम से दूर हटाइए. आप दुःस्वप्नों को हम से ( हमारे जीवन से ) दूर हटाइए. ( ११ ) सुमित्रिया न ऽ आप ऽ ओषधयः सन्तु दुर्मित्रियास्तस्मै सन्तुयोस्मान्द्वेष्टि यं च वयं द्विष्मः.. (१२) जल हमारे अच्छे मित्र हो जाएं. ओषधियां हमारी अच्छी मित्र हो जाएं. जो ३९६ - यजुर्वेद