भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 61

पूर्वार्ध चौथा अध्याय हे वाग् देवी! आप दक्षिणा के योग्य हैं. आप ने बुद्धिपूर्वक हमें देखा है. आप हमारी ( सपरिवार ) आयु क्षीण मत कीजिए यानी हमें दीर्घायु बनाइए. हे देवी! हम भी आप की आयु क्षीण न करें. आप की दया दृष्टि से हम वीर पुत्र पाएं. ( २३ ) एष ते गायत्रो भाग ऽ इति मे सोमाय ब्रूतादेष ते त्रैष्टुभो भाग ऽ इति मे सोमाय ब्रूतादेष ते जागतो भाग ऽ इति मे सोमाय ब्रूताच्छन्दोनामानाम १७ साम्राज्यं गच्छेति मे सोमाय ब्रूतादास्माकोसि शुक्रस्ते ग्रहो विचितस्त्वा वि चिन्वन्तु.. ( २४ ) हे सोम! यह आप का गायत्री ( छंद ) का भाग है. यह सोम के लिए त्रिष्टुप् ( छंद ) का भाग है. यह हमारा सोम के लिए जगती ( छंद ) का भाग है. आप ( पुरोहित ) हमारी ओर से सोम के लिए यह निवेदन करें. आप सोम से यह भी निवेदन करें कि वह हमारे हैं. शुक्र आदि ग्रह उन के नियंत्रण में हैं. सोचविचार ( चिंतन ) कर के ही आप का चयन ( ग्रहण ) किया जाता है. ( २४ ) अभि त्यं देव १७ सवितारमोण्योः कविक्रतुमर्चामि सत्यसव १७ रत्नधामभि प्रियं मतिं कविम्. ऊर्ध्वा यस्यामतिर्भा ऽ अदिद्युतत्सवीमनि हिरण्यपाणिरमिमीत सुक्रतुः कृपा स्वः. प्रजाभ्यस्त्वा प्रजास्त्वानुप्राणन्तु प्रजास्त्वमनुप्राणिहि.. ( २५ ) हे सविता देव! आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के बीच में विराजमान हैं. आप विद्वान, सत्यवान व रत्नों के धाम हैं. आप विद्वानों द्वारा चाहे गए हैं. आप ऊंचाई की ओर जाने वाले, चमकदार, सुनहरे हाथों व श्रेष्ठ कार्यों वाले हैं. आप हम पर अपनी कृपा बनाए रखें. हम आप की अर्चना करते हैं. हम प्रजा के लिए आप की उपासना करते हैं. प्रजा सांस लेने में आप का अनुसरण करती है. आप भी प्रजा का अनुसरण करते हुए सांस लेने की कृपा करें. ( २५ ) शुक्रं त्वा शुक्रेण क्रीणामि चन्द्रं चन्द्रेणामृतममृतेन. सग्मे ते गौरस्मे ते चन्द्राणि तपसस्तनूरसि प्रजापतेर्वर्णः परमेण पशुना क्रीयसे सहस्रपोषं पुषेयम्.. ( २६ ) हे सोम! आप चमकीले हैं. हम आप को चमकते हुए सोने से खरीदते हैं ( अपना बनाते हैं ). आप चंद्रमा के समान मन प्रसन्न करने वाले हैं. आप अमृत जैसे हैं. गोरों और चमकते हुए तपस्वियों के शरीर प्रजापति के रंग जैसे हो जाएं. हम परम पशुधन से आप को खरीदते हैं. आप हजारों का पालनपोषण करने में समर्थ हैं. आप हमारा भी पालनपोषण कीजिए. ( २६ ) मित्रो न ऽ एहि सुमित्रध ऽ इन्द्रस्योरुमा विश दक्षिणमुशन्जुशन्त १७ स्योनः स्योनम्. स्वान भ्राजाङ्घारे बम्भारे हस्त सुहस्त कृशानवेते वः सोमक्रयणास्तान्रक्षध्वं मा वो दभन्.. ( २७ ) हे सोम! आप हमारे मित्र हैं. आप मित्रों का पालनपोषण करने वाले हैं. आप यजुर्वेद - ६१