भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 421 में से

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पृष्ठ 64

पांचवां अध्याय अग्नेस्तनूरसि विष्णवे त्वा सोमस्य तनूरसि विष्णवे त्वातिथेरातिथ्यमसि विष्णवे त्वा श्येनाय त्वा सोमभृते विष्णवे त्वाग्नये त्वा रायस्पोषदे विष्णवे त्वा.. (१) हे अग्नि! आप धनदाता, समृद्धि देने वाले व संसार के पालक हैं. हम विष्णु व सोम के लिए आप को ग्रहण करते हैं. हे सोम! आप अग्नि जैसे और उन्हीं की तरह ऊर्जस्वी हैं. आप यज्ञ में आए मेहमानों का स्वागतसत्कार करते हैं. आप सोमरस को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने वाले श्येन पक्षी के समान हैं. ( १ ) अग्नेर्जनित्रमसि वृषणौ स्थ ऽ उर्वशीयस्यायुरसि पुरूरवा ऽ असि. गायत्रेण त्वा छन्दसा मन्थामि त्रैष्टुभेन त्वा छन्दसा मन्थामि जागतेन त्वा छन्दसा मन्थामि.. (२) हे शकल! आप अग्नि के जनिता ( जनने वाले ) हैं. आप वृषण ( वीर्यवान ) में स्थित हैं. आप उर्वशी ( के समान ) हैं. आप आयु ( के समान ) हैं. आप पुरूरवा ( के समान ) हैं. मैं गायत्री छंद के साथ आप का मंथन करता हूं. मैं त्रिष्टुप् छंद के साथ आप का मंथन करता हूं. मैं जगती छंद के साथ आप का मंथन करता हूं. ( २ ) भवतं नः समनसौ सचेतसावरेपसौ. मा यज्ञ ँ् हि ँ् सिष्टं मा यज्ञपतिं जातवेदसौ शिवौ भवतमद्य नः.. (३) हे अग्नि! आप आलस्यरहित, समान व सावधान चित्त वाले हैं. आप हमारे यज्ञों में यजमानों की भी हिंसा मत होने दीजिए. आप यज्ञ के स्वामी हैं. आप आज से ही हमारा कल्याण करने की कृपा कीजिए. ( ३ ) अग्नावग्निश्चरति प्रविष्ट ऽ ऋषीणां पुत्रो अभिशस्तिपावा. स नः स्योनः सुयजा यजेह देवेभ्यो हव्य ँ् सदमप्रयुच्छन्स्वाहा.. (४) हे यजमानो! आप ऋषियों के पुत्र जैसे हैं. अग्नि शाप से हमारी रक्षा करते हैं. अग्नि आह्वान के योग्य हैं. अग्नि यज्ञकुंड में प्रविष्ट हो चुके हैं. वे अग्नि हम पर कृपालु हों. हम देवताओं के लिए हवि प्रदान करते हैं. वे उस हवि को ग्रहण कर के उन देवताओं तक पहुंचाने की कृपा करें. ( ४ ) ६४ - यजुर्वेद 632/4

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