भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 421 में से

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पृष्ठ 66

पूर्वार्ध पांचवां अध्याय हे अग्नि! आप का शरीर लोहे व चांदी जैसा चमकीला है. आप का शरीर सोने जैसा सुनहरा है. आप के वचन उग्र हैं. आप मनोकामना पूरी करने वाले, गुफा व दुर्गम स्थान के वासी हैं. आप राक्षसों की कठोर आवाजों का नाश करने वाले एवं महिमावान हैं. आप गुफा हैं. आप के लिए आहुतियां भेंट करते हैं. (८) तप्तायनी मेसि वित्तायनी मे ऽ स्यवतान्मा नाथितादवतान्मा व्यथितात्. विदेदग्निर्नभो नामाग्ने अङ्गिर ऽ आयुना नाम्नेहि यो ऽ स्यां पृथिव्यामसि यत्ते ऽ नाधृष्टं नाम यज्ञियं तेन त्वा दधे विदेदग्निर्नभो नामाग्ने अङ्गिर ऽ आयुना नाम्नेहि यो द्वितीयस्यां पृथिव्यामसि यत्तेनाधृष्टं नाम यज्ञियं तेन त्वा दधे विदेदग्निर्नभो नामाग्ने अङ्गिर ऽ आयुना नाम्नेहि यस्तृतीयस्यां पृथिव्यामसि यत्तेनाधृष्टं नाम यज्ञियं तेन त्वा दधे. अनु त्वा देववीतये.. (९) हे पृथ्वि! आप ऊर्जा व धन देने वाली हैं. हे पृथ्वि! आप हमें धृष्टता से बचाने की कृपा कीजिए. हे पृथ्वि! आप यज्ञ के योग्य हैं. 'नभ' नामक अग्नि आप की ओर उन्मुख होने की कृपा करें. अंगिरस अग्नि आयु प्रदान करें. यहां पधारने की कृपा करें. पृथ्वी द्वितीय व तृतीय स्थान में अवस्थित है. हम पृथ्वी पर यज्ञ करते हैं. हम देवताओं के लिए आप को पृथ्वी पर स्थापित करते हैं. (९) सि ᳪ ह्यसि सपत्नसाही देवेभ्यः कल्पस्व सि ᳪ ह्यसि सपत्नसाही देवेभ्यः शुन्धस्व सि ᳪ ह्यसि सपत्नसाही देवेभ्यः शुम्भस्व.. (१०) हे उत्तरवेदिका! आप सिंहिनी की तरह शत्रुनाशी हैं. आप देवताओं के लिए भी कल्पित होने वाली हैं. आप देवताओं के लिए शुद्ध होने की कृपा कीजिए. आप सिंहिनी की तरह शत्रुनाशी हैं. आप देवताओं के लिए शुद्ध होने की कृपा कीजिए. (१०) इन्द्रघोषस्त्वा वसुभिः पुरस्तात्पातु प्रचेतास्त्वा रुद्रैः पश्चात्पातु मनोजवास्त्वा पितृभिर्दक्षिणतः पातु विश्वकर्मा त्वादित्यैरुत्तरतः पात्विदमहं तप्तं वार्बर्हिर्धा यज्ञाम्निः सृजामि.. (११) इंद्र वसुओं के साथ सब ओर से रक्षा करने की कृपा करें. वरुण रुद्रों के साथ पश्चिम से (आप की) रक्षा करने की कृपा करें. पितरों के साथ यम दक्षिण से रक्षा करने की कृपा करें. विश्वकर्मा आदित्यों के साथ उत्तर से रक्षा करने की कृपा करें. हम यज्ञ से आप को तृप्त करने वाला जल सिरजते हैं. (११) सि ᳪ ह्यसि स्वाहा सि ᳪ ह्यस्यादित्यवनिः स्वाहा सि ᳪ ह्यसि ब्रह्मवनिः क्षत्रवनिः स्वाहा सि ᳪ ह्यसि सुप्राजावनी रायस्पोषवनिः स्वाहा सि ᳪ ह्यस्या वह देवान् यजमानाय स्वाहा भूतेभ्यस्त्वा.. (१२) हे उत्तरवेदिके! आप सिंहिनी हैं. सिंहिनी के लिए स्वाहा. आप सिंहिनी हैं. आप ६६ - यजुर्वेद