भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

पूर्वार्ध पांचवां अध्याय हमें शक्तिशाली बनाइए. आप मनुष्यों को पराक्रमी बनाइए. अग्नि अतीव व्यापक, बलशाली व शत्रुनाशी हैं. वे मनुष्य को पराक्रमी बनाएं. अग्नि घृतयोनि हैं. अग्नि घृत को पीने यजमान की बढ़ोतरी करने की कृपा करें. ( ४१ ) अत्यन्याँ २ अगां नान्याँ २ उपागामर्वाक् त्वा परेभ्योविदं परोवरेभ्यः. तं त्वा जुषामहे देव वनस्पते देवयज्यायै देवास्त्वादेवयज्यायैजुषन्तां विष्णवे त्वा. ओषधे त्रायस्व स्वधिते मैन १४ हि १४ सीः.. (४२) हे यूपवृक्ष! आप की कृपा से हम उन वृक्षों को पाएं जिन से हम यज्ञ के खंभे बना सकें. जो वृक्ष यज्ञ ( अथवा यज्ञस्तंभ ) हेतु उपयोगी नहीं हैं, हम उन्हें न पाएं. दूर और पास के वृक्षों में हम ने आप को पास से पाया है. आप वन पालक व प्रकाशमान हैं. हम आप की सेवा करते हैं. ताकि हम देवताओं के लिए किए जाने वाले इस यज्ञ में आप का उपयोग कर सकें. हम आप को घी से सींचते हैं. हम ओषधि से आप की रक्षा का निवेदन करते हैं. कुल्हाड़ा आप की रक्षा करे. कोई भी इस यज्ञस्तंभ की हिंसा न करे. ( ४२ ) द्यां मा लेखीरन्तरिक्षं मा हि १४ सीः पृथिव्या सम्भव. अय १४ हि त्वा स्वधितिस्तेतिजानः प्रणिनाय महते सौभागाय. अतस्त्वं देव वनस्पते शतवल्शो वि रोह सहस्रवल्शा वि वय १४ रुहेम.. (४३) हे यूपवृक्ष! आप स्वर्गलोक को नुकसान न पहुंचाएं. हे यूपवृक्ष! आप अंतरिक्ष को नुकसान न पहुंचाएं. हे यूपवृक्ष! आप पृथ्वी पर उपजाइए. तीक्ष्ण कुल्हाड़ा आप के सौभाग्य हेतु है. प्राणियों के महान सौभाग्य के लिए आप का उपयोग किया जा रहा है. आप की सैकड़ों शाखाओं की तरह हमारे वंश वृक्ष की शाखाएं भी बढ़ जाएं. ( ४३ ) यजुर्वेद - ७३