भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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७० श्रीमद्भगवद्गीता : यथार्थ गीता कर्मेंन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन्। इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते॥६॥ इतने पर भी विशेष रूप से मूढ़लोग, जो कर्मेन्द्रियों को हठ से रोककर इन्द्रियों के भोगों का मन से स्मरण करते रहते हैं वे मिथ्याचारी हैं, पाखण्डी हैं, न कि ज्ञानी। सिद्ध है कि कृष्णकाल में भी ऐसी रूढ़ियाँ थीं। लोग करने योग्य क्रिया को छोड़कर इन्द्रियों को हठ से रोककर बैठ जाते थे और कहने लगते थे कि मैं ज्ञानी हूँ, पूर्ण हूँ। किन्तु श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे धूर्त हैं। ज्ञानमार्ग अच्छा लगे या निष्काम कर्मयोग, दोनों ही मार्गों में कर्म तो करना ही पड़ेगा। यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन। कर्मेंन्द्रियैः कर्मयोगमसक्तः स विशिष्यते॥७॥ अर्जुन! जो पुरुष मन से इन्द्रियों को वश में करके, जब मन में भी वासनाओं का स्फुरण न हो, सर्वथा अनासक्त हुआ कर्मेन्द्रियों से कर्मयोग का आचरण करता है, वह श्रेष्ठ है। ठीक है, समझ में आया कि कर्म का आचरण करें; किन्तु यह प्रश्न खड़ा होता है कि कौन-सा कर्म करें? इस पर कहते हैं- नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥८॥ अर्जुन! तू निर्धारित किये हुए कर्म को कर। अर्थात् कर्म तो बहुत से हैं, उनमें से कोई एक चुना हुआ है; उसी नियत कर्म को कर। कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना ही श्रेष्ठ है। इसलिये कि करते रहोगे, थोड़ी भी दूरी तय कर लोगे तो जैसा पीछे बता आये हैं- महान् जन्म-मरण के भय से उद्धार करनेवाला है, इसलिये श्रेष्ठ है। कर्म न करने से तेरी शरीर-यात्रा भी सिद्ध नहीं होगी। शरीर-यात्रा का अर्थ लोग कहते हैं- 'शरीर-निर्वाह'। कैसा शरीर- निर्वाह? क्या आप शरीर हैं? यह पुरुष जन्म-जन्मान्तरों से, युग-युगान्तरों से शरीरों की यात्रा ही तो करता चला आ रहा है। जैसे वस्त्र जीर्ण हुआ तो दूसरा- तीसरा धारण किया, इसी प्रकार कीट-पतंग से मानव तक, ब्रह्मा से लेकर यावन्मात्र जगत् परिवर्तनशील है। ऊपर-नीचे योनियों में बराबर यह जीव