भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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११४ श्रीमद्भगवद्गीता : यथार्थ गीता करो। दैवी सम्पद् को हृदय-देश में बलवती बनाना प्रवेशिका श्रेणी के योगियों का यज्ञ है। वह दैवी सम्पद् अध्याय १६ के आरम्भिक तीन श्लोकों में वर्णित है, जो है तो सबमें, केवल महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य समझकर उसकी जागृति करें, उसमें लगें। इन्हीं को इंगित करते हुए योगेश्वर ने कहा- अर्जुन! तू शोक मत कर; क्योंकि तू दैवी सम्पद् को प्राप्त हुआ है, तू मुझमें निवास करेगा, मेरे ही शाश्वत स्वरूप को प्राप्त करेगा; क्योंकि यह दैवी सम्पद् परमकल्याण के लिये ही है और इसके विपरीत आसुरी सम्पद् नीच और अधम योनियों का कारण है। इसी आसुरी सम्पद् का हवन होने लगता है इसलिये यह यज्ञ है और यहीं से यज्ञ का आरम्भ है। दूसरे योगी 'ब्रह्माग्नौ'- परब्रह्म परमात्मरूप अग्नि में यज्ञ के द्वारा ही यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं। श्रीकृष्ण ने आगे बताया- इस शरीर में अधियज्ञ मैं हूँ। यज्ञों का अधिष्ठाता अर्थात् यज्ञ जिसमें विलय होते हैं, वह पुरुष मैं हूँ। श्रीकृष्ण एक योगी थे, सद्गुरु थे। इस प्रकार दूसरे योगीजन ब्रह्मरूपी अग्नि में यज्ञ अर्थात् यज्ञस्वरूप सद्गुरु को उद्देश्य बनाकर यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं, सारांशतः सद्गुरु के स्वरूप का ध्यान करते हैं। श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति। शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति।।२६।। अन्य योगीजन श्रोत्रादिक ( श्रोत्र, नेत्र, त्वचा, जिह्वा और नासिका) इन्द्रियों को संयमरूपी अग्नि में हवन करते हैं अर्थात् इन्द्रियों को विषयों से समेटकर संयत कर लेते हैं। यहाँ आग नहीं जलती। जैसे अग्नि में डालने से हर वस्तु भस्मसात् हो जाती है, ठीक इसी प्रकार संयम भी एक अग्नि है जो इन्द्रियों के सम्पूर्ण बहिर्मुखी प्रवाह को दग्ध कर देता है। दूसरे योगी लोग शब्दादिक (शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध) विषयों को इन्द्रियरूपी अग्नि में हवन कर देते हैं अर्थात् उनका आशय बदलकर साधनापरक बना लेते हैं। साधक को संसार में रहकर ही तो भजन करना है। सांसारिक लोगों के