भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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लेखक के प्रति ..... “यथार्थ गीता” के लेखक एक सन्त हैं जो शैक्षिक उपाधियों से सम्बद्ध न होने पर भी सद्गुरु कृपा के फलस्वरूप ईश्वरीय आदेशों से संचालित हैं । लेखन को आप साधना-भजन में व्यवधान मानते रहे हैं किन्तु गीता के इस भाष्य में निर्देशन ही निमित्त बना । भगवान ने आपको अनुभव में बताया कि आपकी सारी वृत्तियाँ शान्त हो गई हैं केवल छोटी-सी एक वृत्ति शेष है - गीता लिखना । पहले तो स्वामीजी ने इस वृत्ति को भजन से काटने का प्रयत्न किया किन्तु भगवान के आदेश का मूर्त स्वरूप है, ‘यथार्थ गीता’ । भाष्य में जहाँ भी त्रुटि होती भगवान सुधार देते थे । स्वामीजी की स्वान्तः सुखाय यह कृति सर्वान्तः सुखाय बने, इसी शुभकामना के साथ ।

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