यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)
Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)
स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा
स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंशास्त्र परमात्मा में प्रवेश दिलानेवाले क्रियात्मक अनुशासन के नियमों का संकलन ही शास्त्र है। इस दृष्टि से भगवान श्रीकृष्णोक्त गीता सनातन, शाश्वत धर्म का शुद्ध शास्त्र है; जो चारों वेद, उपनिषद, समस्त योगशास्त्र, रामचरित मानस तथा विश्व के सभी दर्शनशास्त्रों का अकेले ही प्रतिनिधित्व करती है। गीता मानव मात्र के लिए धर्म का अतर्क्य शास्त्र है। परमात्मा का निवास वह सर्वसमर्थ, सदा रहनेवाला परमात्मा मानव के हृदय में स्थित है। सम्पूर्ण भावों से उसकी शरण जाने का विधान है, जिससे शाश्वत धाम, सदा रहनेवाली शान्ति तथा अनन्त जीवन की प्राप्ति होती है। सन्देश सत्य वस्तु का तीनों कालों में अभाव नहीं है और असत्य वस्तु का अस्तित्व नहीं है। परमात्मा ही तीनों कालों में सत्य है, शाश्वत है, सनातन है।
- स्वामी अड़गड़ानन्द ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० ५२०० वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या ॥ श्रीमद् भगवद् गीता ॥ ॥ यथार्थ गीता ॥ मानव धर्मशास्त्र ॐ श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट न्यू अपोलो एस्टेट, गाला नं 5, मोगरा लेन (रेलवे सबवे के पास), अंधेरी (पूर्व), मुम्बई – 400069 फोन - (022) 28255300 • ई-मेल - contact@yatharthgeeta.com • वेबसाइट - www.yatharthgeeta.com