भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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पृष्ठ 75

४० श्रीमद्भगवद्गीता : यथार्थ गीता ऐसी ही कतिपय कुरीतियाँ अर्जुनकाल में भी थीं। उनका शिकार अर्जुन भी था। उसने विलाप करते हुए गिड़गिड़ाकर कहा कि कुलधर्म सनातन है। युद्ध से सनातन-धर्म नष्ट हो जायेगा। कुलधर्म नष्ट होने से हम अनन्तकाल तक नरक में चले जायेंगे। किन्तु श्रीकृष्ण ने कहा- "तुझे यह अज्ञान कहाँ से उत्पन्न हो गया?" सिद्ध है कि वह कोई कुरीति थी, तभी तो श्रीकृष्ण ने उसका निराकरण किया और बताया कि आत्मा ही सनातन है। यदि आप आत्मिक पथ नहीं जानते तो सनातन-धर्म में आपका अभी तक प्रवेश नहीं हुआ है। जब यह सनातन-शाश्वत आत्मा सबके अन्दर व्याप्त है तो खोजा किसे जाय? इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते। तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि॥२५॥ यह आत्मा अव्यक्त अर्थात् इन्द्रियों का विषय नहीं है। इन्द्रियों के द्वारा इसे समझा नहीं जा सकता। जब तक इन्द्रियों और विषयों का संयोग है, तब तक आत्मा है तो; किन्तु उसे समझा नहीं जा सकता। वह अचिन्त्य है। जब तक चित्त और चित्त की लहर है, तब तक वह शाश्वत है तो; किन्तु हमारे दर्शन, उपभोग और प्रवेश के लिये नहीं है। अतः चित्त का निरोध करें। पीछे श्रीकृष्ण बता आये हैं कि असत् वस्तु का अस्तित्व नहीं है और सत् का तीनों काल में अभाव नहीं है। वह सत् है आत्मा। आत्मा ही अपरिवर्तनशील, शाश्वत, सनातन और अव्यक्त है। तत्त्वदर्शियों ने आत्मा को इन विशेष गुणधर्मों से युक्त देखा। न दस भाषाओं के ज्ञाता ने देखा, न किसी समृद्धिशाली ने देखा, बल्कि तत्त्वदर्शियों ने देखा। श्रीकृष्ण ने आगे बताया कि तत्त्व है परमात्मा। मन के निरोधकाल में साधक उसका दर्शन और उसमें प्रवेश पाता है। प्राप्तिकाल में भगवान मिलते हैं और दूसरे ही क्षण वह अपनी आत्मा को ईश्वरीय गुणधर्मों से विभूषित देखता है। वह देखता है कि आत्मा ही सत्य, सनातन और परिपूर्ण है। यह आत्मा अचिन्त्य है। यह विकाररहित अर्थात् न बदलनेवाला कहा जाता है। अतः अर्जुन ! आत्मा को ऐसा जानकर