भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

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६२ । योगवाशिष्ट ।

श्रीरामजी बोले कि हे मुनीश्वर ! यह जो नाना प्रकार के सुन्दर पदार्थ भासते हैं वह सब नाशरूप हैं, उनकी आस्था मूर्ख करते हैं । यह तो मन की कल्पना मे रचे हुए हैं, उनमें से में किसकी आस्था करूँ ? हे मुनीश्वर अज्ञानी जीव का जीना व्यर्थ है, क्योंकि जीने से उनका कुछ अर्थ सिद्ध नहीं होता । जब कुमार अवस्था होती है तब बुद्धि मूढ़ होती है, उसमें कुछ विचार नहीं होता । जब युवावस्था आती है तब काम क्रोधादिक विकार उत्पन्न होते हैं ये सदा ढाँपे रहते हैं । जैसे जाल में पक्षी बँध जाता है और आकाशमार्ग को देख भी नहीं सकता वैसे ही काम क्रोधादिक में ढँका हुआ जीव विचार मार्ग को नहीं देख सकता । जब वृद्धावस्था आती है तब शरीर जर्जरीभूत और महादीन हो जाता है और जीव शरीर को त्याग देता है । जैसे कमल के ऊपर बरफ पड़ती है तब उसको भँवरा त्याग देता है वैसे ही शरीररूपी कमल को जरा का स्पर्श होता है तब जीव-रूपी भँवरा त्याग देता है । हे मुनीश्वर ! यह शरीर तब तक सुन्दर है जब तक वृद्धावस्था नहीं प्राप्त होती । जैसे चन्द्रमा का प्रकाश जब तक राहु दैत्य ने आवरण नहीं किया तब तक रहता है; जब राहु दैत्य आवरण करता है तब तक प्रकाश नहीं रहता, वैसे ही जरावस्था के आने से युवावस्था की सुन्दरता जाती रहती है । हे मुनीश्वर ! जरा के आने से शरीर कृश हो जाता है, जैसे वर्षाकाल में नदी बढ़ जाती है वैसे ही जरावस्था में तृष्णा बढ़ जाती है और जिस पदार्थ की तृष्णा करता है वह पदार्थ भी दुःखरूप है, इसलिये तृष्णा करके आप ही दुःख पाता है । हे मुनीश्वर ! तृष्णारूपी समुद्र में चित्तरूपी बेड़ा पड़ा है और रागद्वेष-रूपी मच्छों से कभी ऊर्ध्व को जाता है और कभी नीचे आता है, स्थिर कदाचित् नहीं रहता । हे मुनीश्वर ! कामरूपी वृक्ष में तृष्णारूपी लता और विषयरूपी फूल हैं; जब जीवरूपी भँवरा उसके ऊपर बैठता है तब विषयरूपी बेलि मे मृतक हो जाता है । हे मुनीश्वर ! तृष्णारूपी एक बड़ी नदी है उसमें राग द्वेषादिक बड़े-बड़े मच्छ रहते हैं । उसी नदी में पड़े हुए जीव दुःख पाते हैं । जिस संसार की इच्छा करता है वह नाशरूप है । हे मुनीश्वर ! तरंगों के समूह के गणरूपी समुद्र को तरजानेवाले को भी