योगवाशिष्ठ महारामायण
Yog Vashishta Maha Ramayan
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)
पृष्ठ 665, कुल 1734 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपशम प्रकरण ।
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मनोराज के भ्रम को देखने को गाधि ब्राह्मण चला और चलता चलता उस देश में जा पहुँचा जैसे ऊँट काँटों को ढूँढ़ता कण्टकों के वन में जाता है तैसे ही यह जब चाण्डालों के स्थानों को प्राप्त हुआ तब चाण्डालों के स्थान देखे और जहाँ अपना स्थान था उसको देखा और अपनी खेती लगाने का स्थान देखा कि कुछ बेल खड़ी है और कुछ गिर गई है और पशु के हाड़ चर्म जो अपने हाथ से डाले थे प्रत्यक्ष देखे और आश्चर्यवान हुआ कि हे देव ! क्या आश्चर्य है कि चित्त का भ्रम मैंने प्रत्यक्ष देखा। जो बालक अवस्था में क्रीड़ा करने के और भोजन और मद्य पीने के और पात्र इत्यादिक जो खान पान भाग के स्थान थे वह प्रत्यक्ष देखे और महावैराग्य को प्राप्त हुआ। ग्रामवासी मनुष्यों से भी पूछा कि हे माधो ! यहाँ एक चाण्डाल बड़े श्याम शरीरवाला हुआ था तुमको भी कुछ स्मरण है ? हे रामजी ! जब इस प्रकार ब्राह्मण ने पूछा तब ग्रामवासियों ने कहा, हे ब्राह्मण ! यहाँ एक कटजल नाम चाण्डाल कम करके बड़ा हुआ, फिर उसका विवाह हुआ और बेटे बेटी परिवार सहित बड़ा कुटुम्बी हुआ। फिर जब वृद्ध हुआ तो दैव संयोग से अकेला कहीं चला गया और जाता जाता कान्नदेश में वहाँ के राजा के मरने के कारण वहाँ का गज इसको मिला और आठ वर्ष पर्यन्त राज करता रहा। जब नगरवासियों ने सुना कि यह चाण्डाल है तब वह बहुत शोकवान हुए और चिता बनाकर जल मरे। इस प्रकार सुनकर गाधि बहुत आश्चर्यवान हुआ और एकसे सुनकर और से पूछा उसने भी इसी प्रकार कहा। ऐसे बारम्बार लोगों से पूछता रहा और एक मास वहाँ रह फिर आगे चला और नदियाँ, पहाड़, देश, हिमालय पर्वतों की उत्तर दिशा कान्त देश में पहुँचा। जिन स्थानों का वृत्तान्त सुना था सो सबही देखे। जहाँ सुन्दर स्त्रियाँ थीं और जहाँ चमर झूलते थे उनको प्रत्यक्ष देखा। फिर नगरवासियों से पूछा कि यहाँ कोई चाण्डाल राजा भी हुआ है, तुमको कुछ स्मरण है तो मुझसे कहो। नगरवासियों ने कहा, हे माधो ! यहाँ का राजा मर गया था और मन्त्रियों ने एक हाथी छोड़ा था कि जो कोई मनुष्य इस हाथी के सम्मुख आवे उसको राजा करें। जब वह हाथी चला तब उसके सम्मुख