योगतारावली (आदि शङ्कराचार्य - अमनस्क दशा, नादानुसन्धान एवं राजयोग रहस्य सटीक)

योगतारावली (आदि शङ्कराचार्य - अमनस्क दशा, नादानुसन्धान एवं राजयोग रहस्य सटीक)
Yogataraavali of Adi Shankaracharya with Commentary
आदि शङ्कराचार्य (व्याख्याकार: डॉ. रामशङ्कर भट्टाचार्य) द्वारा
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( ४ ) अस्पष्टता का एक हेतु है—श्लोकों के अशुद्ध पाठ--यह कहना अनुचित नहीं होगा। यह भी निवेदनीय है कि हम चूँकि स्थूलरूप से योग का मनन- मात्र करते हैं, अतः अयोग्यता के कारण भी हमारी व्याख्या में कहीं-कहीं भ्रान्ति हो सकती है। पाठकों की सुविधा के लिए एक 'शब्दसूची' भो ग्रन्थान्त में दी गई है। पाठक देखेंगे कि ग्रन्थगत कई शब्द विरल-प्रयुक्त हैं। हठसंकेतचन्द्रिका, हठतत्त्वकौमुदी ( सुन्दरदेवकृत ) आदि विस्तृत ग्रन्थों के प्रकाशन होने पर इन शब्दों के अर्थों को समझने में सुविधा होगी। इति गुरुपूर्णिमा रामशंकर भट्टाचार्य ११-७-१९८७ डी० ३८/८ हौजकटोरा, वाराणसी