योगतारावली (आदि शङ्कराचार्य - अमनस्क दशा, नादानुसन्धान एवं राजयोग रहस्य सटीक)
Yogataraavali of Adi Shankaracharya with Commentary
आदि शङ्कराचार्य (व्याख्याकार: डॉ. रामशङ्कर भट्टाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३५ ) जाङ्गलिक .... १ निश्चलाङ्ग .... १८ जालन्धरबन्ध .... ५ निश्वासलोप .... २१ जीवित .... १५ नेत्र ( अर्धनिमीलित ) .... २१ जृम्भते .... ९, १६, २५ नेत्र (उन्मेषनिमेषशून्य) .... १७ तत्त्वपद .... ४ परमात्मयोग .... २३ तुरीयतत्त्व .... २६ परमात्मा .... २७ तैजस .... २६ पवन ( प्राणवायु ) .... ४ त्रिकूट .... ११ पीयूषधारा (अमृतधारा) .... ७ दृश्यभाव .... १६ प्रत्याहृत .... १२ दृश्योज्झित दृक् .... १५ प्रतीचीनपथ .... १२ दृष्टि .... २७ प्रत्यग्विमर्श .... २४ दृष्टिलक्ष्य .... १४ प्रत्यङ्मुख .... ६ देशकाल .... १४ प्रपञ्च .... १९ द्रष्टृता .... १६ प्रपञ्चचिन्ता .... २४ धन्य .... ७ प्राकृत ( रेचक ) .... १० धारणा .... १४ प्राचीनसंग .... २४ ध्यान .... १४ प्राज्ञ .... २६ नाडी .... ३ प्राण .... १०, १२ नाडी ( भानु-शशाङ्क ) .... ११ प्राणानिल .... ११ नाडीविशुद्धि .... ३ बन्धत्रय .... ८ नाद .... २९ बोध .... ३ नादानुसन्धानसमाधि .... २, ४ ब्रह्मरन्ध्र .... २९ निग्रह (चित्तेन्द्रियों का) .... १८ भद्रा .... २५ निद्रा ( योगनिद्रा ) .... २६ भानु-शशाङ्कनाडी .... ११ निरङ्कुश .... १३ भाव .... २२ निरोधन .... १३ मनः .... १७ निर्वातदीप .... १८ मनोऽतिग .... २२ निर्विकल्प .... २६ मनोन्मनी .... १७, १८