योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंकेतपरिचयः
अ. को. — अमरकोशः | ज्ञा. वि. — ज्ञानदीपविमर्शिनी अ. व. — अभियुक्तवचनम् | त. धा. — तन्त्रवटधानिका अमृ. — अमृतानन्दः | तन्त्रा. — तन्त्रान्तरम् अ. स्त. — अम्बास्तवः | त. वि. — तत्त्वविमर्शिनी अ. हृ. सू. — अष्टाङ्गहृदयसूत्रस्थानम् | तै. आ. — तैत्तिरीयारण्यकम् आज्ञा. — आज्ञावतारः | तै. उ. — तैत्तिरीयोपनिषत् इ. उ. — इतिहासोपनिषत् | त्रि. म. ना. — त्रिपाद्विभूतिमहानारो- उ. त. — उद्धारोर्ध्वतन्त्रम् | यणोपनिषत् उ. नि. — उपनिषत् | द. रू. — दशरूपकम् उ. प. — उदयाकरपद्धतिः | धा. — धातुपाठः उ. ष. — उत्तरषट्कम् | न. शा. — नवशतीशास्त्रम् ऋ. — ऋग्वेदः | नि. — निघण्टुः ऐ. आ. — ऐतरेयारण्यकम् | नि. षो. — नित्याषोडशिकार्णवः ऐ. उ. — ऐतरेयोपनिषत् | न्या. भा. — न्यायसूत्रभाष्यम् क. उ. — कठोपनिषत् | प. — पद्धतिः का. प्र. — काव्यप्रकाशः | प. क्र. — पराक्रमः का. वि. — कामकलाविलासः | प. त्रि — परात्रिंशिका कु. का. — कुसुमाञ्जलिकारिका | प. प. — परापञ्चाशिका कु. त. — कुलार्णवतन्त्रम् | प्र. सा. — प्रपञ्चसारः कु. सं. — कुमारसम्भवकाव्यम् | प्र. हृ. — प्रत्यभिज्ञाहृदयम् कै. उ. — कैवल्योपनिषत् | प्र. व. — प्रमाणवचनम् क्रमो. — क्रमोदयः | प्रा. व. — प्रामाणिकवचनम् क्र. प. — क्रमोदयपद्धतिः | बृ. उ. — बृहदारण्यकोपनिषत् ग. मि. — गङ्गाधरमिश्रः | ब्र. बि. उ. — ब्रह्मबिन्दूपनिषत् ग. स्तो. — गङ्गाधरस्तोत्रम् | ब्र. सि. — ब्रह्मसिद्धिः ग्रन्था. — ग्रन्थान्तरम् | भ. गी. — भगवद्गीता चि. च. — चिद्गगनचन्द्रिका | म. ना. — महानारायणोपनिषत् चि. स्त. — चिद्विलासस्तवः | म. स्व. सं. — महास्वच्छन्दसंग्रहः छा. उ. — छान्दोग्योपनिषत् | मु. उ. — मुण्डकोपनिषत् ज्ञा. का. — ज्ञानकारिका | मु. क्र. — मुख्याम्नायक्रमः