भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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संकेतपरिचयः

अ. को. — अमरकोशः | ज्ञा. वि. — ज्ञानदीपविमर्शिनी अ. व. — अभियुक्तवचनम् | त. धा. — तन्त्रवटधानिका अमृ. — अमृतानन्दः | तन्त्रा. — तन्त्रान्तरम् अ. स्त. — अम्बास्तवः | त. वि. — तत्त्वविमर्शिनी अ. हृ. सू. — अष्टाङ्गहृदयसूत्रस्थानम् | तै. आ. — तैत्तिरीयारण्यकम् आज्ञा. — आज्ञावतारः | तै. उ. — तैत्तिरीयोपनिषत् इ. उ. — इतिहासोपनिषत् | त्रि. म. ना. — त्रिपाद्विभूतिमहानारो- उ. त. — उद्धारोर्ध्वतन्त्रम् | यणोपनिषत् उ. नि. — उपनिषत् | द. रू. — दशरूपकम् उ. प. — उदयाकरपद्धतिः | धा. — धातुपाठः उ. ष. — उत्तरषट्कम् | न. शा. — नवशतीशास्त्रम् ऋ. — ऋग्वेदः | नि. — निघण्टुः ऐ. आ. — ऐतरेयारण्यकम् | नि. षो. — नित्याषोडशिकार्णवः ऐ. उ. — ऐतरेयोपनिषत् | न्या. भा. — न्यायसूत्रभाष्यम् क. उ. — कठोपनिषत् | प. — पद्धतिः का. प्र. — काव्यप्रकाशः | प. क्र. — पराक्रमः का. वि. — कामकलाविलासः | प. त्रि — परात्रिंशिका कु. का. — कुसुमाञ्जलिकारिका | प. प. — परापञ्चाशिका कु. त. — कुलार्णवतन्त्रम् | प्र. सा. — प्रपञ्चसारः कु. सं. — कुमारसम्भवकाव्यम् | प्र. हृ. — प्रत्यभिज्ञाहृदयम् कै. उ. — कैवल्योपनिषत् | प्र. व. — प्रमाणवचनम् क्रमो. — क्रमोदयः | प्रा. व. — प्रामाणिकवचनम् क्र. प. — क्रमोदयपद्धतिः | बृ. उ. — बृहदारण्यकोपनिषत् ग. मि. — गङ्गाधरमिश्रः | ब्र. बि. उ. — ब्रह्मबिन्दूपनिषत् ग. स्तो. — गङ्गाधरस्तोत्रम् | ब्र. सि. — ब्रह्मसिद्धिः ग्रन्था. — ग्रन्थान्तरम् | भ. गी. — भगवद्गीता चि. च. — चिद्गगनचन्द्रिका | म. ना. — महानारायणोपनिषत् चि. स्त. — चिद्विलासस्तवः | म. स्व. सं. — महास्वच्छन्दसंग्रहः छा. उ. — छान्दोग्योपनिषत् | मु. उ. — मुण्डकोपनिषत् ज्ञा. का. — ज्ञानकारिका | मु. क्र. — मुख्याम्नायक्रमः