योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
दीपिकोद्धृतवचनानुक्रमणी ४३१ व्यापिनी केवला शश्व २२५ स्व. सं. शब्दस्पर्शौ रूपं १२३ सौ. सु. २.२१ व्यापिन्यादिचतुष्कं च ३०४ स्व. सं. शब्दस्पर्शी रूपं १४९ सौ. सु. १.४५ व्याप्यव्यापकभावात् १२३ सौ. सु. शरीरं कुलमित्युक्तं २१० स्व. सं. २.२१ शरीरी शिवतत्त्वाज्ञो १६३, १६६ व्योमाम्बुजे सहस्रारे उ. प. १.१ स्व. सं. व्योमेन्दुबह्वह्वचर १६० प्र. सा. ९.३ शषसहा ऊष्माणः ३२८ तन्त्रा. शक्तयोऽस्य जगत्सर्वं ३९० तन्त्रा. शिखिपक्षचित्ररूपै ३६३, ३६४ शक्तिः कुण्डलिनीति ३६२ ल. स्तु. २ वि. भै. ३२ शक्तितत्त्वं शिवो १७० स्व. सं. शिवतत्त्वं समा १७० स्व. सं. शक्तितत्त्वं समा ४७ स्व. सं. शिवशक्तिद्वयं चैव २७२ स्व. सं. शक्तितत्त्वं समा ४८ स्व. सं. शिवशक्तिमिथुन २० का. वि. ५ शक्तितत्त्वं समा १७० स्व. सं. शिवशक्तिरिति ख्यातं ४९, २०८ स्व.सं. शक्तितत्त्वात्मिकां १७० स्व. सं. शिवः करोति सततं ४९ स्व. सं. शक्तिबीजाक्षरं चेति १९३ सं. प. शिवः सर्वस्य कर्तेयं ४९ स्व. सं. शक्तिभिश्च समायुक्ता १९० स्व. सं शिवादिविग्रहात् १७२ स्व. भै. शक्तिमध्यगतो नादः ३७३ शै. त. शिवाभिन्ना परा शक्तिः ६६ स्व. सं. शक्तिरूपं महादेवि ३५ स्व. सं. शिवाकंमण्डलं भित्त्वा २०१ नि. बो. शक्तिरूपं शिवाकारं ३५ स्व. सं. ४.१३ शक्तिशिवावधि १२३ सौ. सु. २.१९ शिवो हकार इत्युक्तः १७९ हं. पा. शक्त्या विना शिवे सूक्ष्मे ३८९ नि.बो. शिष्यात्मप्राणमनसां ३६९ शै. त. ४.७ शुद्धतत्त्वलयभावना १०६, ३१५ शक्त्या शक्तिं विनि १४ नि. बो. १.२९ चि. स्त. ११ शक्लृ व्याप्तौ ५८ धा. १२६२ स्वा. शुद्धविद्येश्वरसदा २७२ स्व. त. शब्दः शान्तत्वघोरत्व १५५ म. स्व. सं. शून्यः स्पर्शस्तथा नादो १९३ सं. प. शब्दस्तु शब्दतन्मात्रं १५५ म. स्व. सं. श्रीकण्ठायेश्वरेणैव १७३ स्व. भै. शब्दस्पर्शगुणः १५६ म. स्व. सं. श्रीकण्ठेन प्रधानादि १७३ स्व. भै. शब्दस्पर्शरूपगुण १५६ म. स्व.सं. श्रीश्च ह्रींश्चैव तुष्टिंश्च २३३ ग्रन्था. शब्दस्पर्शरूपरस १५७ म. स्व. सं. श्रोत्रं चक्षुः स्पर्शनं १४८ सौ.सु. १.४४ शब्दस्पर्शरूपरस १५६ म. स्व. सं. श्रोत्रत्वक्चक्षूरसना १८८ स्व. सं. शब्दस्पर्शरूपरस १८९ स्व. सं. श्रोत्रादिकरणवेद्याः १४९ सौ.सु. १.४६ ¹शब्दस्पर्शादयो बाणा ६९ नि. बो. श्वासद्वयनिरोधेन ३८५ अमृ. ५.४२ श्वेतं च निष्कला शक्ति २२५ स्व सं. १. टिप्पणी ६९ पृष्ठस्था द्रष्टव्या ।
४३२ योगिनीहृदयपरिशिष्टे श्वेतं सुकेशरोपेतं ३२९ स्व. सं. सर्गादिसमष्टिरूपैः १२४ सौ. सु. २.२३ षट्कोणान्तस्त्रिकोणे २८७ स्व. सं. सर्गेण कादिवर्णे १२४ सौ. सु. २.३३ षट्त्रिंशत्संख्याकां १२४ सौ. २.२४ सर्वं खल्विदं ब्रह्म १२६ छा. उ. षण्ढवर्जंमहिमद्युतेः १५३ चि. व. ४० ३.१४.१ षण्ढां सरस्वतीं चैव २३९ स्व. सं. सर्व एव शशिनः १५३ चि. व. ४० षोडशच्छदपद्माङ्क ७२ सु.वा. १२ सर्वजीवनसंरम्भ १८४ स्व. सं. षोडशान्तमिति ख्यातं २४८, ३२४ सर्वज्ञः सर्वकर्ता च ३०४ स्व. सं. स्व. सं. सर्वज्ञतास्य शक्तिः १४७ सौ. सु. १.३६ षोडशी त्यक्षरा देवी २३८ स्व. सं. सर्वज्ञा सर्वशक्तिश्च ३४० नि. षो. १.१७३ संयम्येन्द्रियसंचारं २२७ अ. व., ३५८ सर्वज्ञो हि शिवो वेत्ति १३७ प्र. व. प्रा. व. सर्वदा सर्वकर्ता १६३ स्व. सं. संविदग्नो महासारे २८० सु. वा. ६४ सर्वपीठनिवासिन्यः १०८, २१३ प्रा. व. संहारक्रमयोगेन ३६७ नि. षो. १.११८ सर्वभूतहिते मात ३०३ मन्त्रः संहारात्मकपश्चिम १२२ सौ.सु. २.१७ सर्वयोनिषु संभूय १६५ स्व. सं. संहृतिसृष्ट्यादि १२२ सौ. सु. २.१७ सर्वरत्नसमाकीर्णः ३०४ स्व. सं. स ईक्षत लोकान्नु १३७ ऐ. उ. १.१ सर्ववाङ्मयमूला १९० स्व. सं. सङ्कल्पकारकं १८४ स्व. सं. सर्वविद्याविदाचार्यो १७५ स्व. सं. सङ्कुचितेच्छाद्यात्मक १४८ सौ. सु. सर्वसंविन्नदीभेद ३३३ प. प. १४० सर्वसंक्षोभिणी शक्तिः ३३१ नि. षो. सङ्कोचात् सङ्कुचिताः १४७ सौ. सु. १.१६५ १.३४ सर्वसिद्धिप्रदा देवी ३३७ नि. षो. सचराचरस्य जगतो १४६ सौ. सु. १.१६९ १.२९ सर्वाण्डानि बिभर्तीयं ४८ स्व. सं. सच्च त्यच्चाभवत् १६८ तै. उ. २.६ सर्वावयवसम्पूणों ३०४ स्व. सं. स तया परिमित १४६ सौ.सु १.३३ सर्वावस्थागतानां च २१० स्व. सं. सत्तावाचिनि बीजे तु ३२८ प. प. ४४ सर्वेषामेव शिष्याणां २१० स्व. सं. सप्तमी ऋद्ध्विदा प्रोक्ता २३८ स्व. सं. साक्षात् सङ्केतितं १५४ का. प्र. २.७ सप्तमे शक्तिमध्ये तु ३७२ शै. त. साधनं पुरुषार्थस्य १७३ स्व. नै. सप्तषष्ट्याख्यमेवं १९३ सं. प. सा भवति शुद्धविद्या १४६ सौ. सु. समत्रिकोणशक्त्यग्रं २८३ अ. व. १.३१ समना नाम सा शक्तिः ४८ स्व. सं. सामरस्यवपुरिष्यते २१०, २२५, ३८१ समष्टिबिन्दुना वायुः १५८ अन्यत्र वि. स्त. १ सम्पूर्णकर्तृताद्या १४७ सौ. सु. १.३४ सामान्यार्घ्योक्तमार्गेण २९० स्व. सं.
दीपिकोद्धृतवचनानुक्रमणी ४३३ सा शिवत्वसम ८६ चि. स्त. ३८ स्थितो योऽसौ महापीठो १९३ सं. प. सितशोणबिन्दु २० का. वि. ६ स्थूलं पञ्चाशदाकारं ३०९, ३२१ सिसृक्षोः प्रथमस्पन्दः ३१६ प. प. १८ स्व. सं. सुगन्धिकुसुमैर्द्रव्यैः २८९ स्व. सं. स्थैर्यमेति चमत्कारो २९९, ३१७ क्रमो. सुगुप्ताः सिद्धयः सर्वा २१० स्व. सं. स्पर्शतन्मात्रतो १५६. म. स्व. सं. सुतीव्रशक्तिपातेन १६४ स्व. सं. स्फुटशिवशक्ति २० का. वि. ३ सुनिर्वाणं परं शुद्धं ४९, २०८ स्व. सं. स्फुरितादरुणाद् १४० का. वि. ९ सुपक्वमलकर्माण १६५ स्व. सं. स्यादम्बिकास्वरूपः १२० सौ. सु. २.६ सुपक्वमलविज्ञान १६४ स्व. सं. स्वप्रकाशवपुषा १९७, २१६, २२६ सुरा शक्तिः शिवो मांसं ३८३ अ. व. चि. स्त. ३१ सुश्रीः सुरूपा कपिला २८७ शा. ति. स्वप्रकाशशिव एव २८१ वि. स्त. ५ २.१५ स्वप्रकाशशिवमूर्ति २१०, २२५, ३८१ सुषुम्ना योनिमध्यस्था ३५ स्व. सं. चि. स्त. १ सुषुम्नात्मना नित्य २९६ प. स्वबीजाद्याश्चतुर्थ्यन्त २८७ स्व. सं. सुषुम्ना वृष्टिवाहा च २८९ स्व. सं. स्वभावेन समाराध्या २३०, ३०७ सूक्ष्मं पुर्यष्टकं देव्या ७१ सु. वा. १७ मु. र. सूक्ष्मा चैव सुसूक्ष्मा ४७, ४८ स्व. सं. स्वयमेव समालोक्य ६५ प्र. व. सूर्यकोटिप्रतीकाश ४३ स्व. सं. स्वयम्भुमध्यगा ३७ स्व. सं. सूर्यकोट्यर्बुदप्रख्यः ३०४ स्व. सं. स्वसंवित् त्रिपुरा देवी २८१ प्रा. व., सूर्यबिम्बमधश्चोर्ध्वं २४८ स्व. सं. ३५३ अ. व. सृष्टि स्थितिं च ४९ स्व. सं. स्वस्थे नरे समासीने ३७३ तन्त्रा. सृष्टिः पूर्वाम्नायो १२१ सौ. सु. २.८ स्वाङ्गरूपेषु भावेषु ३४१ प. प. २१ सृष्टिस्थितिसंहारे १२१ सौ. सु. २.८ स्वात्मनि संहृति १२२ सौ. सु. २.१८ सृष्टिस्थितौ तु विष्णुः १२१ सौ. सु. २.१० स्वाधिकारे परे धाम्नि ३७४ शै. त. सृष्टौ शक्तेर्नियत १२२ सौ. सु. २.१८ स्वीकुर्यात् सततं वस्तु २९८ मु. क्र. सृष्ट्यादिभेदभिन्न १२३ सौ. सु. २.२० स्वेच्छाशक्त्युद्गीर्णं १४३ सौ. सु. सेवितो लोकनाथैस्तैः ३०५ स्व. सं. १.३० सैव महाविद्यात्मा १२ ० सौ. सु. २.१ स्वेच्छया स्वभित्तौ ६५ प्र. हृ. २ सैव मायाथ भोगार्थं १८६ स्व. सं. स्वेच्छयैव जगत्सर्वं १६, ११२, २९५, सोऽयं तैजसवैकारि १८८ स्व. सं. ३५२ आज्ञा. सोऽयं दृश्यार्थः स्यात् १२१ सौ. सु. २.९ स्वे महत्युदये धाम्नि २२० सं. प. स्थितिसृष्ट्यादिविभेदे १२२ सौ. सु. हंसवती क्षमापार्श्वं ४० स्व. सं. हकारोऽन्त्यः कला २४, १३३, १९२
४३४ योगिनीहृदयपरिशिष्टे हरवर्णयुगल १२१ सौ. सु. २. १२ हृत्सरोजान्तरे ध्यायन् २७६ प. क्र. हलाकारस्तु नादान्तो ४६ स्व. सं. हृदयात् सूर्यबिम्बं च २८८ स्व. सं. ह्रस्यार्थः स्यादत्र १२१ सौ. सु. २. १० हृदयादिबिलान्तं च ३७० शै. त. हूयते मनसा सार्धं २९६ वि. भै. १४६ हृल्लेखाकर्णिकामध्ये ३८ स्व. सं. हृत्पुण्डरीकं पुर ३४४ म. ना. ८. १६
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मोतीलाल बनारसीदास दिल्ली वाराणसी पटना
[ग्रन्थ-पृष्ठवंश / Book Spine] योगिनीहृदयम् व्रजवल्लभद्विवेदः मोतीलाल