ज़फ़रनामा (श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी - विजय पत्र सटीक)
Zafarnama of Guru Gobind Singh Ji with Commentary
श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशनासिन्द-ए इल्म-ओ आलम ख़ुदा-ए कशा-अन्द-ए कार-ए आलम कुशा-ए *शनासिन्दह - जानने वाला (one who knows) *इल्म - ज्ञान (knowledge) *आलम - संसार, ब्रह्मांड (world, universe) *ख़ुदा - ईश्वर (God) *कशा-अन्द - इसे गतिमान रखने वाला/सम्भालने वाला (is moving it, carrying it) *कार-ए आलम - संसार के कार्य (work of the world) *कुशा-ए - चलाने वाला (moves it) उसे इस ब्रह्मांड की हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान है। उसकी उपस्थिति से हर वस्तु अपने स्थान पर सुव्यवस्थित है। १२ गुज़ारिन्दह-ए कार-ए आलम कबीर शनासिन्दह-ए इल्म-ओ आलम अमीर گزارندہ ے کارِ عالم کبیر شناسندہ ے علم و عالم امیر गुज़ारिन्द-एह-ए कार-ए आलम कबीर शनास-इन्द-एह-ए इल्म-ओ आलम अमीर *गुज़ारिन्दह - चलाने वाला/प्रबंधक *कबीर - महान, महत्वपूर्ण *शनासिन्दह - जानने वाला *इल्म-ओ आलम - संसार का ज्ञान *अमीर - शासक/सेनापति परम सत्ता होने के नाते, वह इस संसार में घटित होने वाली प्रत्येक घटना का संचालन कर रहा है, जिसका उसे पूर्ण ज्ञान है। १३ मरा एतबार-ए बर ईं क़समे नीस्त कि ऐज़द गवाह अस्त यज़दाँ यकीस्त مرا اعتبارے بر ایں قسمے نیست کہ ایزد گواہ است یزداں یکیست मरा एतबार-ए बर ईन क़स्म-ए नीस्त के ऐज़द गवाह अस्त यज़दान यकीस्त *मरा - मुझे/मेरा *एतबार - विश्वास *बर - पर *ईन - यह (औरंगज़ेब की) *क़स्म - शपथ *नीस्त - नहीं है ("ना" - नहीं, "इस्त" - है) *के - कि *ऐज़द - ईश्वर *गवाह - साक्षी *यज़दान - ईश्वर *यकीस्त - एक है ("यक" - एक, "इस्त" - है) मुझे (औरंगज़ेब की) इस शपथ पर तनिक भी विश्वास नहीं रहा। (तुमने लिखा है कि) ईश्वर एक है और वह हमारे बीच साक्षी है। (गुरुजी श्लोक ४५ और ४६ में भी इस शपथ का उल्लेख करते हैं)। १४ ना क़तरह मरा एतबार-ए बरोस्त कि बख़्शी व दीवान हमह किज़्ब गोस्त نہ قطرہ مرا اعتبارے بروست کہ بخشی و دیوان ہمہ کزب گوست अ क़तरह मरा एतबार-ए बर-ओस्त कि बख़्शी वा दीवान हमह किज़्ब गोस्त *क़तरह - बूँद *मरा - मेरा *एतबार - विश्वास *बरोस्त - उस पर है ("बर" - पर, "ओ" - वह, "इस्त" - है) *बख़्शी - सेनापति/प्रतिनिधि *दीवान - मंत्री/सलाहकार *हमह - सभी *किज़्ब - झूठ *गोस्त - बोल रहे हैं ("गुफ़्तन" - कहना, "अस्त" - हैं) मुझे तुम पर एक बूँद के बराबर भी भरोसा नहीं है। तुम्हारे सेनापति और सलाहकार (जो कुरान पर तुम्हारी शपथ लेकर मेरे पास आए थे) सब झूठ बोल रहे थे।