भारतकोश
अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

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२००अध्यात्मरामायण[ सर्ग ९

महानगेन्द्रप्रतिमो महात्मा सुवर्णवर्णोऽरुणचारुवक्त्रः ।<br>महाफणीन्द्राभसुदीर्घबाहु-र्वातात्मजोऽदृश्यत सर्वभूतैः ॥२९॥ | किया ॥ २७-२८ ॥ उस समय समस्त प्राणियोंको वायुपुत्र महात्मा हनूमान्‌जी महान् पर्वतराजके समान विशालकाय, सुवर्णवर्ण अरुण (बालसूर्य) के समान मनोहर मुखवाले और महान्‌ सर्पराजके समान दीर्घ भुजाओंवाले दिखलायी देने लगे ॥ २९ ॥


इति श्रीमदध्यात्मरामायणे उमामहेश्वरसंवादे किष्किन्धाकाण्डे नवमः सर्गः ॥ ९ ॥


समाप्तमिदं किष्किन्धाकाण्डम्

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