भारतकोश
अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

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श्रीराम

कोसलपाल कृपालु, आप ही हैं प्रेरकवर । प्रभु-इच्छा ही पूर्ण सतत करते सब सुर-नर । इससे भी जो बना आपकी ही लीला है। अहो ! आपकी केलि परमविस्मयशीला है !! अब इसको दीजे यही, दानी दशरथलाल ! तुम्हें छोड़ चाहे न कुछ—

पदपायक
मुनिलाल


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