भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

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८६ अकबर बीरबल विनोद विशेष जानते हो ? बादशाह ने बारी बारी से इसी प्रकार अनेकों प्रश्न किया, परन्तु वह तो सोहबल्ले की तरह पहले से ही पढ़ाकर पक्का कर दिया गया था, उत्तर काहेको देता । अब बीरबलको उसे सँभालने की बारी आई । वह बोला— “पृथिवीनाथ ! आपके पूछने का इस आदमी ने यह अर्थ निकाला है कि न जानें बादशाह यह सब बातें पूछकर पीछे क्या करें । क्योंकि ऐसी कहावत उसे पहले ही से याद है— “राजा योगी अग्नि जल, इनकी उल्टी रीति । डरते रहियो भाइयो थोड़ी पालैं प्रीति ।” पदार्थ मौन धारण कर लिया है। आपने सुना होगा—“चुप्पा सबसे भला ।” बादशाह को बारबल की शिक्षा से आनन्द प्राप्त हुआ और अहीर को घर जाने की छुट्टी मिल गई । ━०:*:०━ सौवाँ अंश । एक दिन बादशाह दरबार के कामों से निपटकर संध्या समय आराम बाग में बीरबल से मनोरंजन की बातें कर रहा था। इसी बीच उसने भुलावा देकर पूछा—“बीरबल ! तुम अनेकों बार अपनी स्त्री के हाथ से हाथ मिलाया होगा, क्या बतला सकते हो, उसके हाथ में कितनी चूड़ियाँ हैं ?” बीरबल ने उत्तर दिया—“गरीबपरवर ! इधर बहुत दिनों से मुझे अपनी बीबी के हाथ से हाथ मिलाने का सुअवसर नहीं मिला फिर भी मैं विश्वास के साथ कहने को तैयार हूँ कि आप जिस दाढ़ी पर अपना हाथ नित्य फेरते और उसे देखा करते