भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

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( ७ ) विषय पृष्ठ संख्या १११-पारस से बीरबल की समता ३४५ ११२-मानो चन्द्र को चीर कुसुम चुवायो ३४६ ११३-सूर और कादर ३४७ ११४-जड़ वृक्ष की साक्षी ३४८ ११५-हँसना अथवा रोना ३५० ११६-दो गधों का बोझ ३५२ ११७-मैं ब्राह्मण बनूँगा ३५३ ११८--शिकार में दिल चस्पी ३५५ ११९-बेगम का कोप ३५७ १२०--दिल्ली के कौवों की गणना ३६२ १२१--औसान सच्चा है ३६३ १२२-अकबर भारत ३६४ १२३-मणिपुराधीश द्वारा बीरबल के न्याय की परीक्षा ३६८ १२४--चञ्चल नैन छिपै न छिपाये ३७० १२५-टूटे-फूटे सड़े को कैसी विधि सराहिये ३७१ १२६-केहि कारण डोल में हालत पानी ३७२ १२७-केहि कारण प्रात बफात है पानी ३७३ १२८-न्याय की घंटी ३७४

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