अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
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( ९ ) विषय पृष्ठ संख्या १४६—शायद कोई पट्ठा चढ़ गया ४२१ १४७—यहाँ है, वहाँ नहीं, यहाँ नहीं पर वहाँ है यहाँ वहाँ दोनों जगह नहीं है और यहाँ वहाँ दोनों जगह है ,, १४८—हुजूर गधे आ रहे हैं ४२३ १४९—यह तो हमारा ही है ,, १५०—बारह में से चार गये ४२४ १५१—दो मास का एक मास ,, १५२—खुश वा नाखुश ,, १५३—आपही बादशाह कैसे होते ४२५ १५४—जो ईश्वर न करे उसे मैं करूँ ,, १५५—आम की चोरी ४२६ १५६—कुरान की बे नुकते वाली टीका ४३० १५७—नौका का न्याय ४३२ १५८—चतुर और भुग्गा ४३६ १५९—आप मुझको चाटते थे और मैं आपको चाट रहा था ,, १६०—कौन सुखी है ४४० १६१—निकस्यो रवि फोड़ पहाड़ की ताईं ४४१