भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

पृष्ठ 258, कुल 292 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 258

अकबर बीरबल विनोद २४४ राम झरोखे बैठ के, सब सौदा कर लेत । जो जैसा कर लावता, वाको वैसहिं देत ॥ अब मैं उसको भूल गया एक दिन बादशाह बीरबल से हँसी मजाक करते हुए पूछ बैठे-“बीरबल ! मैंने सुना है कि तुम्हारी स्त्री नितान्त सुन्दरी है दरअसल क्या है?” बीरबल ने उत्तर दिया- “पृथिवीनाथ ! मुझे भी ऐसा ही गुमान था, परन्तु बेगम साहिबा को देखकर अब मैं उसे एकदम भूल गया हूँ।” बीरबल को कुत्तों की हाकिमी एक दिन बादशाह अपने चुने २ दरबारियों के साथ बातांलाप कर रहे थे। इसी अन्तर्गत अब्दुलफजल नामी दरबारी को बीरबल की हँसी उड़ाने की सूझी। वह बीरबल को चिताकर बोला-“बीरबल ! आज से तुमको कुत्तों की हाकिमी प्रदान की जाती है।” बीरबल झट बोल उठा-“फिर तो आपको मेरी आज्ञा पालन करनी पड़ेगी। उलटे मुँह खाकर अब्दुलफजल शरमिन्दा हो गया। फिर कभी उससे बीरबल से ऐसी छेड़खानी नहीं करी। एक हजार जूते एक दिन बादशाह बीरबल को झिपाने की नीयत से उसके जूते गुम करा दिये। जब घर जाने का समय हुआ