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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 618 में से

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१४ आल्हखण्ड। देखन केरी अभिलाषा जो ओ महराज कनौजीराय ४ बूढ़े बाम्हन की बातें सुनि लीन्ह्यो चन्दभाट बुलवाय ॥ औसमुझायो फिरित्यहिकोसब यहु रणबाधु चँदेलोराय ५ सुनिकै बातें चंदेले की चलिभो चन्दभाट शिरनाय ॥ चढ़िकै घोड़ाकी पीठौमाँ दिल्ली शहर पहुंचा जाय ६ जायकै पहुँच्च्यो त्यहिफाटकमाँ जहँ दरबार पिथौरा क्यार ॥ दीख पौरिया चन्दभाट को गरुई हांक दीन ललकार ७ हुकुम दर्रो हुकुम दर्रो साहेबजादे बात बनाव ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहौ जल्दी आपन नाम बताव ८ सुनिकै बातें दरवानी की बोल्यो चन्दभाट ततकाल ॥ देश हमारो कनउज जानो जावैं जहाँ बैठ नरपाल ६ मोहिं पठायो जयचंद राजा हमरो चन्दभाट है नाँउ ॥ खवरि जनावो पृथुइराज को ओ दरवानी बात बनाउ १० सुनिकै बातें चन्दभाट की सो दर्बार पहुंचा जाय ॥ हाथ जोरिकै दोउ बोलतभा औ चरणनमें शीशनवाय ११ चन्दभाट कनउज ते आयो ओ महराज पिथौराराय ॥ हुकुम जो पावैं महराजा को तो मैं लावों साथ लिवाय १२ सुनिकै बातें दरवानी की बोले पृथीराज महराज ॥ लावो लावो त्यहि जल्दी सों आयोचन्दभाटक्यहिकाज १३ सुनिकै बातें महराजा की दौरत चला पौरिया जाय ॥ सँग माँ लैके चन्दभाट को औ दर्बार पहुंचा आय १४ चन्दभाट तब लखि पिरथी का दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ कह्यो सँदेशा चन्देला जो सो पिरथीका दियो सुनाय १५ सुनि संदेशा चन्देले का भा मन खुशी पिथौराराय ॥

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य) · पृष्ठ 19, कुल 618 में से · BharatKosha