भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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संयोगिनिस्वयम्बर । १५

साल दुसाला दिह्यो भाट को गल माँ हार दीन पहिराय १६ आगे पठयो चन्द भाट को पाछे हिरसिंह लियो बुलाय ॥ चन्द कबीश्वर को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय १७ बाना बदल्यो पृथुइराज ने मन माँ श्रीगणेशको ध्याय ॥ सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को औ सुर्यन को माथनवाय १८ तीनों चलिभे फिरि दिल्लीसों सीता राम चरण मन लाय ॥ आठ रोज को धावा करिकै कनउज धुरादबाइनिआय १९ त्यही समइया त्यहि अवसर माँ राजा कन उज का सरदार ॥ मन्त्री बैठरहे बायें माँ तासों बोल्यो बचन उदार २० एक मना सोना को लै कै औ कारीगर लेव बुलाय ॥ मूरति रचिकै दरवानी की सो द्वारे पर देव धराय २१ सुनिकै बातें महराजा की मन्त्री तुरत उठा शिरनाय ॥ मूरति पौरिया की बनवायी औ द्वारे पर दियो रखाय २२ त्यही समइया त्यहि अवसरमाँ पहुँचा चन्दभाट फिरिआय ॥ खबरि सुनायो सब दिल्ली की औ चरणनमें शीशनवाय २३ हिरसिंह ठाकुर चन्द कबीश्वर तिनके साथ पिथौराराय ॥ तीनों मिलिकै त्यहि पाछे सों औ दरबार पहुंचे आय २४ दीख सिंहासनपर जयचँदको भारी तहां दीख दरबार ॥ बैठै क्षत्री अरूझ्वारा सों एक सों एक शूर सरदार २५ दयर मुकदिमा बहु खूनी हैं बहुतक ठाढ़े तहां वकील ॥ अऊ जेहल को पहुँचायेगे काहुकि दीन हथकड़ी ढील २६ त्यही समइया त्यहिअवसर माँ आगे चन्दकवीश्वर जाय ॥ बहु पद गायो सभा मध्य में आपन दीन्ह्यो नाम बताय २७ कह्यो सँदेशा पृथुइराज ने ओ महराज कनौजीराय ॥

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