भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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१६ आल्हखण्ड । बहुत कामहैं यहि समया में ताते सक्यों नहीं मैं आय २८ सुनि संदेशा दिल्लीपति का बोला तुरत कनौजीराय ॥ सरबरि हमरी का नहीं हैं ह्वाँ मुहँ कौन दिखावैं आय २६ सुनिकै बातें चन्देले की हिरसिंह ठाकुर उठा रिसाय ॥ ऐसी तुमको पै चहिये ना जैसी कहौ कनौजीराय ३० आज पिथौरा सब लायक है ठाकुर समरधनी चौहान ॥ सनमुख लरिहै जो संगर में रहिहै नहीं तासु को मान ३१ हम तो नौकर पृथुइराज के तैसे नौकर अहिन तुम्हार ॥ कच्ची बातें पै कहिये ना राजा कनउज के सरदार ३२ हमें बताइये अब टिकने को ओ महराज कनौजीराय ॥ थके थकाये हम आये हैं दोऊ नैन रहे अलसाय ३३ पाछे ठाढ़े पृथुइराज हैं तिनको दीख चँदेलाराय ॥ मन अनुमान्यो तब बहुविधिसों औ मन्त्रीको लियोबुलाय ३४ सुखिया बांदी को बुलवाओ तासों पान दिवाओ आय ॥ वह पहिचानै भल पिरथी को सनमुख जातै गई लजाय ३५ सुनिकै बातें महाराजा की मन्त्री चाकर लीन बुलाय ॥ तिनसों मंत्री यह बोलत भा सुखिया बांदी लयोबुलाय ३६ पाहुन आये हैं दिल्ली सों तिन को पान खवावै आय ॥ एक के कहतै तब दुइदौरे चाकर तीन पहुंचे जाय ३७ सुखिया सुखिया कै गोहरावा सुखिया बांदी बात बनाउ ॥ तुम्हें बुलावा महाराजा है जल्दीनिकरि महलतेआउ ३८ सुनिकै हल्ला तिन चकरन को सुखिया - चलीतड़ाकाधाय ॥ दौरे आई दरवाजे के पूंछनलागिहालसबआय ३९ हाल पायकै सब चकरन ते मनमाँ गई सनाका खाय ॥