आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंयोगिनिस्वयंम्बर। १७
लज्जा करिहौं यहि समया में मारा जाय पिथौराराय ४० यहै सोचिकै मन अपनेमाँ महलन तुरत पहुँची आय ॥ लैके डिब्बा. सोनेवालो तामें बीरा धरे लगाय ४१ लैके डिब्बा फिरि महलन सों चकरन साथ चली हर्षाय ॥ जायकै पहुँची त्यहि मन्दिर में जहाँ पर बैठ कनौजीराय ४२ औ रुख दीख्यो महाराजा को सब को दीन्हो पान गहाय ॥ रंचक लज्जा जब दीख्यो ना तब मनरुचा कनौजीराय ४३ नहीं पिथौरा इन तीनोंमाँ नाहक गयो हृदय भ्रमछाय ॥ यहै सोचि कै मन अपने माँ फिरि मंत्रीकोलियोबुलाय ४४ इन्हें टिकावो लै बगिया माँ खीमा तहाँ देव गड़वाय ॥ हुकुम पायकै महाराजा का तीनों निकर द्वारपर आय ४५ मूरति दीख्यो फिरि द्वारपर जो अनुहारि पिथौरा केरि ॥ बार बार तहँ तीनों मिलिकै सब अँग रहे तासुके हेरि ४६ मूरति दीख्यो निज सूरतिकै तब जरिमरा पिथौराराय ॥ जायकै पहुँच्यो फिरि बगियामें तम्बू गड़ा तहाँपर आय ४७ बिछेउ पलँगरा तहँ निवारि को मखमल गद्दा दियो डराय ॥ धरेउ उशीशे में गिरदा को तामें ल्यट्यो पिथौराराय ४८ त्यही समइया त्यहि औसरमाँ औ पदमिनिका सुनो हवाल ॥ त्यहिसुनिपावानिजमहलनमाँ बगियाटिक्योआयनरपाल ४६ तब ललकारा निज बांदिनका अबहीं पलकी लवो लिवाय ॥ सुनिकै बातें संयोगिनि की तेसब पलकी लई सजाय ५० सुमिरि भवानी शिवशंकर को मनमें श्रीगणेश को ध्याय ॥ बैठि पालकी में संयोगिनि मनमें सियामातु पदलाय ५१ जायकै पहुँची त्यहि बगिया में जहाँ पर टिका पिथौराराय ॥
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