भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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६ आल्हखण्ड । ४२ सुनिकै बातें हरिकारा की ताल्हन बोला बनारसक्यार ॥ भयो बखेड़ा है धूरेपर . हूँवनाचली बिषमतलवार ४५ हम फिरियादी कनउज जावैं राजा जयचंद के दरबार ॥ सुनिकै बातें ये ताल्हनि की सोऊ बोला बचन उदार ४६ उन घर नायब चंदेलो है जो परिमाल मोहोबे क्यार ॥ एक महीना की छुट्टी लै आयो घरे आपने यार ४७ तुमचलिजावो परिमालिकढिग तौ सब काज सिद्धि ह्वैजाय ॥ नाहिं तो बरसैं तुमका लगिहैं मानो सत्य सत्य सबभाय ४८ सुनिकै बातें हरिकारा की ये चलिगयो जहाँ परिमाल ॥ तुरतै मिलिकै परिमालिक सों अपनो गायगयो सबहाल ४६ बड़ी प्रीतिसों परिमालिक तब इनको द्वार दीन टिकवाय ॥ सिधा मँगायो सब क्षत्रिन को ताल्हनि खानादीन मँगाय ५० बनी रोसइयाँ राजपूतन की क्षत्रिन जेइँ लीन ज्यँवनार ॥ अब यहु लड़िका जम्बैवाला ठाकुर माड़ोका सरदार ५१ दावतिआवै सो मोहवे को करिया करिया के अनुमान ॥ बजै नगाड़ा त्यहि फौजन माँ भारी होय घोर घमसान ५२ सुन्यो नगाड़ा के शब्दन को चक्रित भयो रजापरिमाल ॥ तब हरिकारा दुइ आवतभे तेसब कह्यो वहाँ परहाल ५३ सुनिकै बातें हरिकारा की फाटक बन्द लीन करवाय ॥ तवलों करिया फौजैं लै कै फाटक ऊपर पहुँचा आय ५४ हुकुम लगायो राजपूतन को कुल्हड़न फाटक देव गिराय ॥ मर्दिगर्दै करि सब मोहवे को नेका टकालेउँ निकराय ५५ तौतौ लरिका मैं जम्बै का नाहिं ई डारौं मुच्छमुड़ाय ॥ नीके गहना ये देहैं ना कादर बंश चँदेलाराय ५६