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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 618 में से

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महोबेका प्रथमयुद्ध । ४१ ५ सुनिकै बातें ये माहिल की करिया चरण शीश नवाय ॥ बिदा माँगिकै फिरि माहिलसों तम्बू तुरत पहुंचा आय ३३ हुकुम लगायो सब क्षत्रिनको हाँते कूच देव करवाय ॥ करो तयारी अब मोहबे की सीताराम चरणको ध्याय ३४ सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्री सबै भये हुशियार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ३५ कूच के डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥ चालिभो करिया फिरि मोहबेको मनमें किहे गंगको ध्यान ३६ त्यही समय की बातें हैं यारो सुनिल्यो कान लगाय ॥ चारो भाई हैं बकसर के जिनका कही बनाफरराय ३७ रहिमलें टोंडेर बच्छराजैं औ चौथे देशराजैं महराज ॥ मीराताल्हन हैं बनरस के जिनके नौ लड़िका शिरताज ३८ अली अलोमत औ दरियाखां बेटा जानबेगें सुल्तानै ॥ मियांबिसारतैं औ दरियाई नाहर कारे औ कल्यानै ३६ कारे बाना करे निशाना कारे घोड़न पर असवार ॥ चीरा शिर पर है सुलतानी मीराताल्हन केर कुमार ४० ये सब मिलिकै यकठौरी है डाँड़ पै किहेनि बखेड़ाजाय ॥ जयचंद केरी तहँ ठकुरी है जिनका कही कनौजीराय ४१ सब फिरियादी गे कनउज को पहुँचे नगर महोबा जाय ॥ नगर महोबा सों कनउज को रस्ता सीध निकरिगै भाय ४२ यक हरिकारा सों पूँछत भे चारों भई बनाफरराय ॥ जावा चाहें हम कनउज को जहँपै रहैं चँदेलोराय ४३ सुनिकै बातें इन चारों की सोऊ कहा बचन हर्षाय ॥ कौने मतलब को जावत हौ हमते सत्य देव बतलाय ४४

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