श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished811 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| तृतीय सर्ग | |
| रामोपासक तथा कृष्णोपासक दो विप्रोंमें परस्पर मधुर विवाद | ४०७ |
| दोनों ब्राह्मणोंका विवाद निपटानेके लिए आकाशवाणीका होना | ४०६ |
| चतुर्थ सर्ग | |
| एक कौए को रामका वरदान | ४०७ |
| रामपर आसक्त सौ नागरिक स्त्रियोंका आगमन | ४०८ |
| उन स्त्रियोंकी अनुचित प्रार्थनापर रामका उत्तर और वरदान | ४०९ |
| रामका दास-दासियोंको बुलाना, किन्तु वहाँ किसीका उपस्थित न रहना, लक्ष्मणका अपने दूत भेजकर उन्हें बुलवाना और दास-दासियोंका हरिकीर्तन छोड़कर आनेसे इन्कार करना | ४१० |
| मध्य रात्रिमें एक स्त्री (निद्रा) का रुदन सुनकर पुष्पक द्वारा रामका उसके पास जाना और उसे वरदान देना | ४११ |
| कुम्भकर्णके पोत्र पौण्ड्रककी लंकापर चढ़ाई करके विभीषणको परास्त करना और विभीषणका रामके पास आकर अपना दुःख सुनाना | ४१२ |
| रामका लंका जाकर पौण्ड्रकको परास्त करके विभीषणको राजगद्दीपर बिठाना कुछ काल बाद मूलकासुरसे परास्त होकर विभीषणका रामकी शरणमें जाना | ४१३ |
| सामन्त राजाओंके साथ रामकी मूलकासुर-पर चढ़ाई और भीषण युद्ध होना | ४१४ |
| ब्रह्माजीके द्वारा मूलकासुरके मरणकी गुप्त युक्तिका ज्ञात होना और रामका सीताको लानेके लिए गरुड़को भेजना | ४१५ |
| पञ्चम सर्ग | |
| रामके विरहसे सीताकी व्यथाका वर्णन | ४१६ |
| रामसे मिलनेके लिए सीताका विविध मन्नतियाँ मानना | ४१७ |
| सीताका गरुड़पर आरूढ़ होकर प्रस्थान, राम-सीताका मिलाप और मूलकासुरका वध करनेके लिए रथपर सवार होकर सीताका रण-भूमिको प्रयाण | ४२० |
| षष्ठ सर्ग | |
| सीता-मूलकासुरका सामना और वार्तालाप | ४२० |
| सीताके हाथों मूलकासुरका वध | ४२१ |
| ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा सीताकी स्तुति | ४२२ |
| रामके हाथों विभीषणका राज्याभिषेक | ४२३ |
| विभीषणके द्वारा भलीभाँति सम्मानित होकर रामका त्रिकूटाका सत्कार करना | ४२४ |
| रामका अयोध्या लौटना | ४२५ |
| लवणासुरसे त्रस्त मुनियोंका रामके पास जाना और च्यवन मुनिका लवणासुरके पूर्वजन्मका वृत्तान्त | ४२५ |
| रामकी आज्ञासे शत्रुघ्नका लवणासुरको मारने-के लिये मधुवन जाना | ४२६ |
| सप्तम सर्ग | |
| शत्रुघ्न द्वारा लवणासुरका वध | ४२८ |
| अपनी सेनाके साथ रामका दिग्विजयके लिए प्रस्थान | ४२९ |
| पुष्करदा अगद लोन राजाओंके साथ रामका तुमुल युद्ध | ४३० |
| उन्हें जीतकर रामका मथुरा जाना और वहाँसे यदनादि विविध देशोंकी यात्रा | ४३१ |
| अष्टम सर्ग | |
| रामकी किम्पुरुष आदि देशोंकी विजययात्रा, भारतवर्षके विविध द्वीपों, द्वैपाय्य नदियों और पर्वतोंका वर्णन | ४३१ |
| नवम सर्ग | |
| रामकी प्लक्षादि द्वीपोंकी विजययात्रा | ४३५ |
| विविध द्वीपोंपर विजय प्राप्त करते हुए रामका दूतोदसागर पहुँचना | ४३७ |
| रामकी शाकद्वीप यात्रा | ४३८ |
| रामका पुष्करद्वीप पहुँचना | ४३९ |
| लोकालोक पर्वत तक जाकर रामका अयोध्या लौटना | ४४० |
| जीते हुए द्वीपोंपर राम द्वारा अपने भाइयों और पुत्रोंकी नियुक्ति | ४४१ |
| दशम सर्ग | |
| रामका लक्ष्मणसे एक कुत्तेके रोनेका कारण पूछना | ४४१ |
| पूछनेपर कुत्तेका व्यर्थ मारनेवाले एक संन्यासी-को अपराधी बताना | ४४२ |
| रामका संन्यासीको बुलवाना और दोष प्रमाणित हो जानेपर कुत्तेके ही अपराधीको |