भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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११६श्रीमदानन्दरामायणे[ सर्गः ११

प्रेषयामास सैन्येन वस्त्राद्यैस्तोषितान् जनान् । वन्दारुस्तेऽपि नत्वा तं रावणं संगरं ययुः ॥ २७५॥
एवं रामरावणयोः सैन्यानि च परस्परम् । सयुक्तानि सम्मुखानि संगरार्थं महास्वनैः ॥२७६॥
इति श्रीरामकोटिकामचरितांतर्गत श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये सारकाण्डे
युद्धचरिते रामरावणसेनासंगरो नाम दशमः सर्गः ॥ १० ॥

एकादशः सर्गः

( श्रीरामके द्वारा रावणका वध )
श्रीशिव उवाच
अथ ते राक्षसाः सर्वे द्वारेभ्यः क्रोधमूर्च्छिताः । निर्गत्य भिंदिपालैश्च खड्गैः शूलैः परश्वधैः ॥ १ ॥
कुन्तैः शरैः शतघ्नीभिः संक्रयैः शक्तिभिर्दृढम् । निजघ्नुर्वानरानीकं महाकाया महाबलाः ॥ २ ॥
राक्षसांश्च तदा जघ्नुर्वानरा जितकाशिनः । वृक्षैर्ग्रहावैः पर्वतैश्च मुष्टिभिः करताडनैः ॥ ३ ॥
ते हयैश्च गजैश्चैव रथैः काञ्चनसन्निभैः । रक्षांस्याद्या ययुधिरे नादयन्तो दिशो दश ॥ ४ ॥
एवं परस्परं चक्रुर्युद्धं वानरराक्षसाः । नलो जघान धूम्नाक्षं वज्रदंष्ट्रं स मारुतिः ॥ ५ ॥
नरांतकं स तारेयः सुषेणस्तं महोदरम् । चतुर्थांशावशेषेण निहतं राक्षसं बलम् ॥ ६ ॥
तदांगदाद्याश्चत्वारो महावाद्यमहोत्सवःै । प्रणेमु राममागत्य जयघोषप्रपूरिताः ॥ ७ ॥
स्वसैन्यं निहतं दृष्ट्वा मेघनादो ययौ तदा । सर्पास्त्राद्व्याकुलं रामं चकार बंधुवानरैः ॥ ८ ॥
रामः संस्मार तार्क्ष्यं स तार्थ्यः सार्पं न्यवारयत् । ततः स्वस्थ्यो ब्रह्मवरोदद्भातं गतोऽसुरः ॥ ९ ॥
सर्वास्त्रकुशली व्योम्नि ब्रह्मास्त्रेण समन्ततः । ववर्ष शस्त्रास्त्राणि ब्रह्मास्त्रं मानयंस्तदा ॥१०॥
क्षणं तूष्णीमुपासाद्य रामः स बंधुवानरैः । ततः स्वस्थो रघूत्श्रेष्ठो ददर्श पतितं बलम् ॥११॥
मूर्च्छागतं ब्रह्मपाशैस्तदा लक्ष्मणमब्रवीत् । चापमानय सौमित्रे ब्रह्मास्त्रेणासुरान् क्षणात् ॥१२॥

द्वारपर महोदरको वस्त्रादिके दानसे सन्तुष्ट करके शीघ्र सेनाके साथ भेज दिया वे लोग भी रावणको नमस्कार करके युद्धभूमिपर गये ॥ २७४ ॥ २७५ ॥ इस प्रकार राम-रावणकी सेनाएं परस्पर युद्ध करनेके लिए भीषण गर्जन करती हुई एक दूसरेके सामने जा डटीं ॥ २७६ ॥ इति श्रीमत्कोटिकामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये सारकांडे 'ज्योत्स्ना' भाषाटीकायांरामरावणसेनासंयोगो नाम दशमः सर्गः ॥ १० ॥

शिवजी बोले—बादमें वे सब महाकाय तथा महाबली राक्षस दृढ़ क्रोधके साथ दरवाजोंसे निकल-निकल कर बर्छी, तलवार, त्रिशूल, फावड़ा, बाण, तोप तथा शक्तियां लेकर वानरी सेनाको दृढ़ताके साथ मारने लगे ॥ १ ॥ २ ॥ विजयी वानर भी वृक्ष, पत्थर, पर्वत, मुक्का तथा थप्पड़ोस राक्षसोंको पीटने लगे ॥ ३ ॥ उधर राक्षस भी दसों दिशाओंको गुंजाते हुए घोड़े, हाथी तथा सुवर्णसदृश रथांपर आरूढ़ होकर युद्ध करने लगे ॥ ४ ॥ इस प्रकार वानर और राक्षस आपसमें लड़ने लगे । नलने धूम्नाक्षको और मारुतिने वज्रदंष्ट्रको मारा ॥ ५ ॥ तारासुत अङ्गदने नरान्तकको मारा और सुषेणने महोदरका संहार डाला । इस प्रकार राक्षसोंकी सेना चार भागोंमेंसे केवल एक भाग बाकी रही और सब मार दी गयीं ॥ ६ ॥ तब अंगदादि चारों वीरोंने जयध्वनि करते हुए सोत्साह बाजे-गाजेके साथ रामके पास जाकर प्रणाम किया ॥ ७ ॥ अपने सैन्यको निहत देखकर मेघनादने सर्पास्त्रसे बाँधकर भाई लक्ष्मण तथा वानरों सहित रामको व्याकुल कर दिया ॥८॥ तब रामने गारुडास्त्रका स्मरण किया । उसने आकर उस सर्पास्त्रका निवारण किया । तब वह असुर मेघनाद ब्रह्माके वरके प्रतापसे अन्तर्धान हो गया और सभी शस्त्रास्त्रोंको चलानेमें कुशल इन्द्रजित् अलक्षित होकर आकाशसे चारों तरफ ब्रह्मास्त्र द्वारा बाणोंकी वर्षा करने लगा । उस समय ब्रह्मास्त्रकी मर्यादा रखनेके लिये बन्धु तथा वानरों सहित राम क्षणभरके लिए चुप हो गये । तदनन्तर जब स्वस्थ होकर रामने निहारा तो अपनी सेनाको