श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 298, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें| २८२ | आनन्दरामायणे | [ सर्ग ७ |
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जातो यस्तस्तदाऽस्माकं जीवितानि नदीजले इति तासां वचः श्रुत्वा दूतास्ते राघवं जवात् ॥३७॥
दास्या निवेदयामासुः स्त्रीवृत्तं तन्मविस्तरम् । श्रुत्वा दासीमुखाद्रामः सैकते मञ्चके स्थितः ॥३८॥
समाहूय स्त्रियः सर्वा ददर्श रघूनायकः । ताश्चापि दृष्ट्वा श्रीरामं मेनिरे कृतकृत्यताम् ॥३९॥
नत्वा राघवं गत्वा लज्जयाऽधोमुखाः स्त्रियः । पाडिताः कामवाणैश्चतस्थुः श्रीरामसन्निधौ ॥४०॥
ताः पप्रच्छ राघवोऽप्यागमनेऽत्राथ कारणम् । ता गणव तदा प्रोचुः सर्वं वेत्सि त्वमीश्वर ॥४१॥
ज्ञात्वा तासां रामचन्द्रो हृद्गतं प्राह ताः पुनः । एकपत्नीव्रतं मेऽस्ति चैतज्जन्मनि भोः स्त्रियः ॥४२॥
न ज्ञेयं मे मृषा वाक्यं गम्यतां स्वस्थलं जवात् माऽभूदधर्मो मद्राज्ये राज्ञां वै निरयप्रदः ॥४३॥
इति राघववाग्बाणैर्भिन्नमर्मस्थलाः स्त्रियः । ययुर्मूर्च्छां क्षणदेव मिकतार्या सहस्रशः ॥४४॥
ता मूर्च्छाविह्वला दृष्ट्वा रामो विह्वलमानसः । नारीः संतोपयन् प्राह हे नार्यः श्रूयतां मम ॥४५॥
वाक्यं खेदापहं वोऽद्य द्वापरे कृष्णरूपधृक् । अहं ब्रजे भविष्यामि नन्दगोपेशपालिते ॥४६॥
तदा देवास्तु गोपाला भावि मद्वरदानतः । भविष्यन्ति सुरेशश्च नन्दसूनुर्भविष्यति ॥४७॥
भविष्यथ तदा यूयं गोपिकाः सकला व्रजे । युष्माकं पूरयिष्यामि यथेच्छं वाञ्छितं तदा ॥४८॥
रासक्रीडां हि युष्माभिः करिष्यामि न संशयः । बृन्दावन तु कालिंद्यां सैकते निशि वै चिरम् ॥४९॥
भवध्वं स्वस्थचित्ताश्च गच्छध्वं स्वस्थलं मुतः । इति रामवचोऽमृतसुधया जीविताः स्त्रियः ॥५०॥
किञ्चित्सन्तुष्टहृदो रामं नत्वा जम्मुर्निजं स्थलम् । एतस्मिन्नन्तरे तत्र मधुस्नानार्थमादरात् ॥५१॥
मायापुर्याः समायाता रम्या गुणवती शुभा ।
श्रीरामचन्द्र उवाच
का सा प्रोक्ता गुणवती किशीला कस्य कन्यका ॥५२॥
देखनेके लिए आयी हैं। यदि इसी समय हमको रामके दर्शन नहीं मिलेगे तो हम सब इस सरयू नदीमें कूदकर अपने प्राण दे देंगी, ऐसी बात सुनकर दूतगण तुरन्त रामके पास दौड़े ॥ ३६ । ३७ ॥ वहां पहुंचकर उन्होंने दासियों द्वारा रामचन्द्रजीके पास सब समाचार कहलाया और स्त्रियोंके उस वृत्तान्तको दासियोने विस्तारपूर्वक रामको सुना दिया। दासियोंके मुखसे यह सुनकर रामने उन सब देवाङ्गनाओको बुलवाया। पास पहुंचकर स्त्रियोने भगवान्को देखा। देवाङ्गनाओने उनकी उस स्वरूप छबिको देखकर अपनेको कृत-कृत्य समझा ॥ ३८ ॥ ३९ ॥ ... होकर लज्जित होकर भगवानको प्रणाम किया और कामबाणसे पीडित होकर वहींपर बैठ गयीं ॥ ४० ॥ रामने उनके आगमनका कारण पूछा। उन्होंने कहा-आप सबके ईश्वर हैं, भला आपसे कौन बात छिपी रह सकती है। आप सब कुछ जानते हैं ॥ ४१। उनके मनकी बात जानकर रामने कहा-हे हे स्त्रियो इस जन्ममे तो मैं एकपत्नीव्रतधारी हूँ ॥ ४२। मैं जो कह रहा हूँ उसे मिथ्या मत समझना। अच्छा, अब तुम लोग अपने-अपने डेरेपर जाओ। ऐसा करो कि जिससे मेरे द्वारा किसी प्रकारका अधर्म न हो क्योंकि जिस राजाके राज्यम अधर्म होता है, उसे नरकगामी होना पड़ता है ॥ ४३ । इस तरह रामकी बातें सुनकर कामबाणसे पीडित वे हजारों स्त्रियाँ क्षणमात्र मूर्छित हो गयीं ॥ ४४ ॥ उनको मूच्छित देखकर विह्वलमस्तक रामचन्द्रजी उनका सन्ताप दूत हुए कहने लगे -हे नारियो ! मेरी बात सुनो, इस तरह अधैर्य मत होओ ॥ ४५ ॥ जो मै कहता हूँ, उसे सुनकर तुम्हारा सब खेद दूर हो जायेगा। द्वापरमें मै कृष्णरूपसे नन्द गोपेश द्वारा पालित व्रजमें जन्म लूँगा। उस समय समस्त देवता मेरे आशीर्वादसे गोप होंगे इन्द्र नन्दरूपसे जन्म लेंगे और तुम सब उन गोपालोंकी गोपियाँ होओगी। उस समय मैं तुम लोगोंकी समस्त कामनाएँ पूर्ण करूँगा ॥ ४६-४८ ॥ वृन्दावनम यमुनाकी रेतीमें रात्रिके समय तुम लोगोंके साथ मै रासक्रीड़ा करूँगा । ४९ । अब तुम लोग स्वस्थ होकर अपने-अपने स्थानको जाओ। इस तरह रामके वचन-रूपी सुधासे जीवित और किंचित् सन्तुष्ट होकर वे अपने-अपने स्थानको लौट गयीं इसके अनन्तर माया