श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 384, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३६८ | आनन्दरामायणे | [ सर्गः ६ |
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नीराजितः पुरस्त्रीभिर्विवेश निजमन्दिरम् । वसिष्ठांस्ते ताः सर्वाः प्रेषयामास राघवः ॥२५॥
अथ रामः सभामध्ये मन्त्रिभिश्चिदमब्रवीत् । धावन्तु नगरे राजन् मुमुदश्च मुनीश्वराः ॥२६॥
सीतासुराः सरोगाश्च स्वस्वजानपदैः सह । मुहूर्त्तस्यावशेषेयं परिखाः सप्त सादरम् ॥२७॥
शोधनीयास्तथा सौधमद्मेषु सुधा शुभा । नया चित्राणि लेख्यानि प्रासादेषु मर्मन्तः ॥२८॥
देवालयेषु सर्वेषु सुधा देया मनोरमा । लेखनीयानि चित्राणि रत्नयःस्थापना पृथक् ॥२९॥
वन्दनीयाः पताकाश्च रोषणीया ध्वजा अपि । दर्भाश्चतोरणानि बन्धनीयानि लक्ष्मण ॥३०॥
वेद्यः कार्या ह्युदग्रराया बन्धनायाश्च मण्डपाः । शृङ्गार्णीया दशरथातिथिवत्काश्च सहस्रशः ॥३१॥
गन्धर्वभ्यः पन्नगेभ्यो वस्तु गेहानि वै पृथक् । कृकन्य नूतनान्यायस्तत्रार्थः पूरितानि च ॥३२॥
अन्यदपि यथायोग्यं यद्यजानसि लक्ष्मण । तत्कुरुष्व मयोक्तं मया तव रघूद्वह ॥३३॥
तद्रामवचनं श्रुत्वा तथेत्युक्त्वा स लक्ष्मणः । तथा चकार तत्सर्वं यथा रामेण निश्चितः ॥३४॥
अथ गन्धर्वराजन्तु तथा वै यम पन्नगाः । महाङ्गुः सगरोधाम्न ययु शीघ्र मुदान्विताः ॥३५॥
सर्वे मानवरूपेण हस्त्यश्वरथसंस्थिताः । गन्धर्वाश्चापि सैन्यैस्ते संहतोपवनं ययुः ॥३६॥
ततस्तानागतान् श्रुत्वा प्रत्युद्गम्य रघूद्वहः । नानाद्यानि नार्थश्च नृत्यैरङ्गरमां युगम् ॥३७॥
नीत्वा संस्थापयामास विस्तीर्णेषु गृहेषु सः । अथ वैकदा रामः सभायां संस्थितः सुखम् ॥३८॥
ज्योतिर्विदः समाहूय वसिष्ठं च पुरोधसम् । पृथग्विवाहानुकल्पे स मुहूर्तानभिमङ्गलान् ॥३९॥
सम्यग्विचारयामास सभामध्ये भविष्यतः । ज्योतिर्विदन्तदा प्रोचुर्मुहूर्तानतिमोददान् ॥४०॥
पक्षान्तरेण वैशाखे द्वौ मुहूर्ती शुभावहौ । तथा तदूर्ध्वतो द्वौ ज्येष्ठे पक्षान्तरेण ते ॥४१॥
शुक्लेन मार्गशीर्षेऽपि त्रीन् मार्गफान्गुनेऽपि च । एवं द्वादशकां स्त्री चकुलैगिनिश्चियम् ॥४२॥
उन बालकोंका अपन पूजी त । रथ कि साथ ... तिर ऊपर आकाशमगत गन्धर्व कलाका देखते हुए वहांसे चल दिये ओर एक प्रहरम अयोध्या आये ॥२३ । २४ । वहाँ पहुँचनेपर पुरवासिनी स्त्रियोंने उनकी आरती उतारी और उन स...लोग रामके वहाँ भेज दिया, २५ । तदनन्तर रामने रामजी लक्ष्मणसे कहा कि सभासो, मार्गिको ओर मुनिश्वरों यों निमन्त्रण भेज दो कि सब लोग अपनी स्त्रियों तथा पुरवासियोंके साथ अयोध्य । ध्यान । भागलगे अयोध्यानगरीका शृङ्गार करो ॥२६॥ अयोध्याके सब मकान चूनेसे पुतवाये जायं और उसपर नये और विचित्र प्रकारके चित्र बनाये जायें । २७ ॥ समस्त देवालयम अच्छी तरह पुताइके, ओर लोग गन्ध अक्षत और सिन्दू बनाकर पूजनका सुप्रबन्ध किया जाय ॥ २८ ।, २९ । पताका बांधो जायं ध्वजाहरोपण कि जायं और मन्दिरोंके चारों ओर तोरण बांधे जायें । जहाँ तहाँ सुगन्धित वेदियाँ बनवाई जायं । दशरथादि समस्त अतिथियोंका सत्कार किया जाय । गन्धर्व-पन्नगादि लोगोंके लिये नये-नये मकान बनवाकर नाना भांति तरह सब दस्त आbordersका प्रबन्ध कर दो ॥ ३०-३२ ॥ हे लक्ष्मण ! जो मैं कह चुका हूँ, वह और जो मैं नहीं कहपाया हूँ और तुम जानते होसो सो भी ठीक कर लो ॥ ३३ । रामकी बात सुनकर लक्ष्मणने तथा... ही किया था, तदनुसार सब प्रबंध कर दिया ॥ ३४ ॥ इसके अनन्तर चित्राङ्गद और तक्षकप्रभृत बन्धु सम्बन्धिाने यथायोग्यतया सब हर्षपूर्वक अयोध्याको चल दिये ॥ ३५ ॥ उस समय समस्त सर्वो ने मानव रूप धारण किया ओर घोड़े तथा रथपर सवार होकर अयोध्या आये । गंधर्व भी अपनी विशाल सेनाके साथ माहेन्द्रपुर आ पहुंचे ॥ ३६ ।... ३७ ॥ इसके बाद सब रामचन्द्रजीने सुना कि वे लोग अयोध्या आ गये हैं तो विविधप्रकार के बाजों और नाचके साथ नगरीमे ले जाये और खूब लम्बे चौड़े भवनमें उनको ठहराया । इसके अनन्तर एक समय राम सब लोगोंके साथ सभामें बैठे तो वशिष्ठ तथा अनेक ज्योतिर्विदोंको बुलाकर और विवाहके लिए अलग-अलग मुहूर्ताका अच्छी तरह विचार करनेको कहा । ज्योतिष्योने गगन आकाशगत अतिशय सुखकारी मुहूर्त विचारकर कहा कि एक पक्ष बीतनेपर वैशाख मासमें दो मुहूर्त हैं । एक पक्षके अनन्तर ज्येष्ठ मासमें भी दो ही मुहूर्त हैं। ३८-४१ ॥ दो