भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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६८४ आनन्दरामायणे [ सर्गः १२

चैत्रे मासि सिते पक्षे नवम्यां परमे दिने । पुनर्वस्वर्क्षसंयुक्त प्रोच्चस्थे ग्रहपंचके ॥ ४ ॥ मध्याह्ने प्रकटो जातः श्रीरामो राजसद्मनि । आनन्दश्च तदा जातः सर्वत्र जगतस्तले ॥ ५ ॥ देवदुंदुभयो नेदुः पुष्पवृष्टिः शुभावपत् । राजसद्मनि वाद्यानां संघा नेदुः पृथक् पृथक् ॥ ६ ॥ ननृतुर्वारनार्यश्च जगुर्गीतं मनोरमम् । तदा सर्वं हि भूमिस्या जना द्रष्टुं शिशुं शुभम् ॥ ७ ॥ अययुर्नृपजं बालं दृष्ट्वा मुदमवाप्नुयुः । नानाविमानमारूढा दिवि देवाः सवासवाः ॥ ८ ॥ मिलित्वा राघवं द्रष्टुं कौसल्याजठरोद्भवम् । ब्रह्मा रुद्रश्च सूर्यश्च देवेंद्रायसुराः शुभाः । ९ ॥ उत्सवान् विदधुः सर्वं तदा श्रीरामजन्मनि । एवमुत्साहसमये देवा हर्षाद्दिवि स्थिताः ॥ १०॥ नमस्कृत्या रामचंद्रं तुष्टुवुविविधैः स्तवैः । प्रोचुस्तदा सुराः सर्वे हर्षार्हं रघूत्तमम् ॥ ११॥ अद्य धन्या वयं देव मुक्ताश्चासुरजाद्भयात् । यन्निमित्तं त्वया देव ह्यवतारः कृतो भुवि ॥ १२॥ अस्माकं हर्षकालोऽयं नैवदेव कृपानिधे । तस्मादयं मदा पुण्यः श्रेष्ठः कालो भविष्यति ॥ १३॥ त्वं चाप्यंगीकुरुष्व ह्य देह्यस्मै सुवहून् वरान् इति तेषां वचः श्रुत्वा देवानां राघवः शुभम् ॥ १४॥ तुतोष नितरां तेषु वरेषु भगवान्हरिः । श्रीराम उवाच सम्यक् प्रोक्तं सुराः सर्वे त्रैलोक्योपकारकम् १५ । भवद्भिः प्रार्थितोऽहं तु हर्षकाले महत्समे । शृणुध्वं वचनं मेऽद्य यत्पर्वांप्रोच्यते मया ॥ १६॥ सर्वषामेव मासानां श्रेष्ठोऽयं भविष्यति । वैशाखात्कात्तिकः श्रेष्ठः कार्तिकात्माघ एव च ॥ १७॥ माधमासादथावाय चैत्रमासो भविष्यति । चैत्रमासे कृतं दत्तं हुतं स्नातं त्रिवितिनम् । १८॥ सर्वं कोटिगुणं प्रो क्तमयोध्यायां विशेषतः । यत्प्प्लवाश्व समेधेन यद्गोमेधेन वै फलम् ॥ १९ । यत्फलं सोमयागेन तच्चैत्रे स्नानमात्रतः । सूर्यग्रहे कुरुक्षेत्रे यत्पुण्यः स्नानदानतः ॥ २०।

उसका उत्तर देता हूँ सुनो-॥ २ । अयोध्या नगरीके पालक महाराज दशरथकी रानी कौसल्याके उदरसे चैत्रमासके शुक्लपक्षकी नवमी तिथिको पुनर्वसु नक्षत्रमें जब कि पाँच ग्रह ऊंच स्थानमें बैठे थे, तब मध्याह्नके समय अवधेश दशरथके घरमें श्रीरामचन्द्रजी अवतरे । उस समय जगततलमें सर्वत्र आनन्द छा गया ॥ ३-५॥ देवताओने दुन्दुभियां बजायीं और पुष्पवृष्टि की । राजाके महलोंमें अलग-अलग विविध प्रकारके बाजे बजे ॥ ६ ॥ वेश्याय नाचन और गाने लगीं उस समय पृथ्वीमण्डलके प्रमुख मनुष्य उस बच्चेको देखनके लिए आये और उस देख देखकर बड़ प्रसन्न हुए । उसी तरह नाना प्रकारके विमानोंपर चढ़-चढ़कर इन्द्र आदि देवता भी एकत्र होकर कौसल्याके गर्भस उत्पन्न रामको देखनके लिए आये । उस समय ब्रह्मा, रुद्र, सूर्य तथा देवेन्द्र आदि देवताओंने श्रीरामचन्द्रजीके जन्मक उपलक्ष्यमे विविध उत्सव किये । इस तरह उत्साहके समय आकाशमे विद्यमान दयता रामको प्रणाम करके नाना प्रकारके स्तोत्रोंसे स्तुति कर रहे थे । समय पाकर देवताओने रामसे कहा- । ७-११॥ हे देव ! आज हम लोग धन्य हैं। अब हम लोग राक्षसोंके भयसे मुक्त हो गये । क्योंकि इसीलिए आपने अवतार लिया है ॥ १२ ॥ हे देव ! हे कृपानिधे ! यह हम लोगोंके लिए महान् हर्षका समय है । इसीके कारण यह पवित्र समय सर्वश्रेष्ठ माना जायगा ॥ १३ ॥ अप भी इस बातको अङ्गीकार करते हुए इस समयको बहुतसे वरदान दीजिए । उनकी ऐसी बात सुनकर भगवान् रामचन्द्रजी उनपर बहुत प्रसन्न हुए और कहा-हे देवताओ ! आपलोगोंने बड़ी अच्छी बात कही है और तीनों लोकोंके उपकार करनेवाले विविध स्तोत्रोंसे स्तुति की है। इससे मैं बहुत प्रसन्न होकर कहता हूँ । १४-१६ ॥ यह मास सब मासोंमें श्रेष्ठ होगा । वैशाखसे कार्तिक श्रेष्ठ है, कार्तिकसे माघ श्रेष्ठ है और माघसे भी यह चैत्रमास श्रेष्ठ होगा । इस मासमें किया हुआ दान, हवन, स्नान और ध्यान यह सब कर्म करोड़गुना फल देगा और अयोध्यामे तो उससे भी विशेष फल प्राप्त होगा जो फल अश्वमेधसे होता है, जो फल गोमेधसे होता है