भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिका (पृष्ठ १३)

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
लक्ष्मणका जाना, लव और लक्ष्मणमें युद्ध३२५विवाहकाण्ड<br>प्रथम सर्ग<br>रामकी सभामें महाराज भूरिकीर्तिका स्वयंवर पत्र आना३४५
लक्ष्मणका लवको ब्रह्मापाशमें बाँधकर राम- के समक्ष ले जाना, रामके आज्ञानुसार लोगों- का लवपर जलके घड़े उड़ेलना और लवका लड़ना३२६पत्र पढ़नेके अनन्तर रामका स्वयंवरमें जानेकी तैयारी करना, रामकी स्वयंवरयात्रा३४६
लवको छुड़ानेके लिए कुशका जाना३२७रामका अपने पुत्रोंके साथ स्वयंवरमें पहुँचना३४७
राम-लक्ष्मण और कुशका युद्ध३२८रामका आगमन सुनकर राजा भूरिकीर्तिकी नगरनिवासिनी महिलाओंकी प्रसन्नताका वर्णन३४८
अष्टम सर्ग<br>रामका एक मन्त्रीको वाल्मीकिके पास भेजना३२९द्वितीय सर्ग<br>दूसरे रोज रामका स्वंयबर-सभामें जाना और रामके दूतोंका वहाँ आये हुए राजाओंका परिचय देना३४९
रामकी सभामें वाल्मीकिका सीताके साथ लिये हुए आना३३०सभामें चम्पिका नामकी राजकन्याका प्रवेश३५०
रामके प्रति वाल्मीकिकी उक्ति और सीताको हाथों सहित देखकर रामका सन्देह३३१चम्पिकाको साथ लिये मुन्यन्दाका सब राजाओंके समक्ष जाना और चम्पिकाको उन राजाओंकी स्थिति समझाना३५१
सीताकी शपथ, सीताका पृथ्वीमें प्रवेश करना और पृथ्वीसे रामकी प्रार्थना३३२चम्पिकाका सब राजाओंके सामनेसे होकर रामके सम्मुख पहुँचना३५३
पृथ्वीपर रामका कोप और रामका पृथ्वीसे सीताको वापस पाना३३३अन्तमें चम्पिकाका कुशके सामने पहुँचना और कुशके गलेमें वरमाला डालना३५४
यज्ञमें आये हुए राजाओं और ऋषियोंकी विदाई३३४तृतीय सर्ग<br>मुनन्दाका सुमति नामकी दूसरी राजकन्याको साथ लेकर पहलेकी तरह सब राजाओंका यश सुनाना३५५
नवम सर्ग<br>ऊर्मिला, माण्डवी तथा श्रुतकीर्ति आदिका गर्भिणी होना और यथासमय पुत्र उत्पन्न करना, पुत्रोंकी उत्पत्तिके अवसरपर रामका उत्साह३३५सुमतिका सब राजाओंके सामनेसे होकर लवके समक्ष पहुँचना और उनके गलेमें वर- माला डालना, दूसरे दिन भूरिकीर्तिका रामके पास जाकर विदाईके लिए मुहूर्त निश्चित करना३५७
रामका कुलगुरु वशिष्ठसे सब बच्चोंके शुभाशुभ लक्षण पूछना और वशिष्ठका सब बालकोंके लक्षण बतलाना३३६विवाहकार्यका प्रारम्भ३५८
पुत्रवती बहिनोंके साथ सीताका सानन्दमय जीवन बिताना३३८लव-कुशका विवाहसण्डपमें पहुँचना और विवाह सम्पन्न होना३५९
गुरु वशिष्ठसे रामका लव-कुशके उपनयनका परामर्श और व्रतबन्धकी तैयारियोंके लिये रामका लक्ष्मणको आदेश३३९चतुर्थ सर्ग<br>विवाहके अनन्तर होनेवाले लोकाचार३६०
व्रतबन्ध (उपनयन) संस्कार समारोह३४०भूरिकीर्तिकी नगरीसे राम आदिको विदाई, रामका अयोध्या पहुँचना और अयोध्यावासियों द्वारा उनका स्वागत३६१
व्रतबन्धसंस्कार३४१
लव-कुश आदि बालकोंका वेदाध्ययन, बालकोंका गुरुगृहसे वापस आनेपर अयोध्या नगरीके उत्साहका वर्णन३४२
जन्मकांडके सुननेका फल और उसकी महिमाका वर्णन३४४