भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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१२विषयानुक्रमणिका
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
पालकीपर चढ़कर रामका सीता तथा सब परिवारको साथ लेकर वनकी यात्रा करना२९५पुष्पक विमान द्वारा उस समय रामका भी वहाँ पहुँचना और बादमें रामका भी अश्वमेध यज्ञ करनेका निश्चय करना३०९
इन लोगोंका वनमें पहुँचना और वनकी शोभाका वर्णन२९६स्वर्णमयी सीता बनाकर रामका यज्ञाारम्भ, रामके नन्द्वे यज्ञ पूर्ण होना और कुशकी उत्पत्तिका वृत्तान्त३१०
द्वितीय सर्गवाल्मीकिका कुश-लवको रामायणकी शिक्षा देना और अल्प समयमें उनका सीखना३११
राम-सीताका वनविहार२९८पञ्चम सर्ग
छठें मासमें सीमन्तोन्नयनसंस्कार और जनकजीसे रामका सीतालयारसम्बन्धी वार्तालाप२९९विष्णुदासकृत रामदाससे रामरक्षास्तोत्रके विषयमें प्रश्न और रामरक्षास्तोत्रका सार३१२
वनमें, जहाँ कि सीता आकर रहनेवाली थीं, वहाँपर जनकजीका प्रबन्ध३००रामरक्षास्तोत्रका माहात्म्य३१३
तृतीय सर्गरामनामके स्मरणका फल३१५
रामका सीताको त्यागनेका कारण बतलाना३०१षष्ठ सर्ग
रामका विजय नामक गुप्तचरसे जनताके गुप्त विचार पूछना३०२सीताका बारम्बार उसे पतिवियोग दूर करनेके लिए कोई व्रत पूछना और उनका बतलाना३१६
उसके मुखसे प्रजाके हृदयकी यह बात मालूम करना कि सीता कितने ही वर्ष रावणके यहाँ रह चुकी थीं, फिर भी उसे रामने अपना लिया। यह अच्छा नहीं किया। विजयका रामको एक धोबीकी बात सुनाना। कैकेयीका सीतासे रावणकी आकृति पूछना और सीताका दोपहरमें केवल रावणके एक अँगूठेका आकार बनाना३०३सीताका व्रतारम्भ और लवका रामके बगीचे-से कमल लाने जाना३१७
सीताके चली जानेपर कैकेयीका उस अँगूठे-के अनुरूप रावणके सारे शरीरकी तसवीर बना देना और इसी समय रामका पहुँचना, तसवीरके विषयमें रामके पूछनेपर कैकेयीका सीताकी बनायी बतलाना३०४लवका बगीचेके रक्षकोसे मुठभेड़ और विजयी होकर लौटना३१८
प्रातःकालके समय सीताको वनमें त्यागनेके लिए लक्ष्मणका प्रस्थान३०५दूसरे दिन फिर लवका उन लोगोंसे युद्ध और लवकी विजय३१९
वाल्मीकिके आश्रमपर पहुँचकर गद्गद वाणी-में लक्ष्मणका सीताको सब वृत्तान्त बतलाना३०६रामका लवको पकड़नेके लिये वाल्मीकि ऋषिके आश्रमपर दूत भेजना, इसपर वाल्मीकिका यह उत्तर देना कि चलो, मैं रामके अपराधीको लेकर स्वयं वहाँ आता हूँ३२०
चतुर्थ सर्गसप्तम सर्ग
रामकी उस आज्ञा पालन करनेके लिए लक्ष्मणका विचार करना-जिसमें उन्होंने कहा था कि लौटते समय सीताके दोनों हाथ काट ले आना। उस निर्दय कार्यको करनेमें असमर्थ लक्ष्मणका प्राण त्यागनेपर उद्यत होना और बढ़ईके रूपमें विश्वकर्मासे भेंट३०७रामका अन्तिम यज्ञके लिये श्यामकर्ण घोड़ा छोड़ने और उसरीतिसे वाल्मीकिका सीताके साथ रामके यज्ञमें जाना३२१
विश्वकर्माका सीताकी भुजा बनाकर देना और उसे लेकर लक्ष्मणका अयोध्या लौटना३०८कुश-लवका रामायणगान सुनकर सबका मुग्ध होना और बादमें रामकी सभामें लव-कुशका रामा-यणगान३२२
अर्धरात्रिके समय सीताके गर्भसे पुत्ररत्न उत्पन्न होना३०८रामका उन दोनों बालकोंको पुरस्कार दिला-दाना और उनका लेनेसे इनकार करना३२३
लवका रामके श्यामकर्ण बहेड़ेको पकड़ना और लव तथा शत्रुघ्नका संग्राम, लवका हनुमान्, सुमन्त्र और भरतको काँखमें दबाकर माता सीताके पास ले आना३२४
रामके आज्ञानुसार लवको पकड़नेके लिये