श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished811 पृष्ठ
पृष्ठ 7, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 7
विषयानुक्रमणिका
| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| यज्ञके ऋत्विजोंको रामका दान ओर अतिथियोंको उपहार भेंट | २४४ | सप्तम सर्ग | |
| सिंहासनारूढिन रामको नदी-समुद्र तथा अन्यान्य देवताओंसे विविध प्रकारके उपहार मिलना | २४५ | रामके यहाँ व्यासजीका आगमन <br> व्यासका रामके एक पत्नीव्रतकी प्रशंसा करना | २७९ |
| अयोध्यामें रामका दरबार | २४६ | रामका व्यासजीसे अगले जन्ममें बहुत-सी स्त्रियोंको प्राप्त करनेका उपाय पूछना | २८० |
| यज्ञमें आये हुए अतिथियोंका प्रस्थान | २४७ | व्यासजीके आज्ञानुसार रामका दोसह्र सीताकी सुवर्णमूर्तियें दान देना, रामके सम्मुख कितनी ही देवांगनाओंका आकर रामपर मुग्ध होना | २८१ |
| —:o:— <br> विलासकाण्ड <br> प्रथम सर्ग | उन स्त्रियोंको रामका वरदान | २८२ | |
| शिवकृत रामस्तवराज | २४९ | अष्टम सर्ग | |
| द्वितीय सर्ग | गुणवतीका वृत्तान्त, अरण्यमें गुणवतीके पतिका मरण | २८३ | |
| रामके द्वारा सीताके सौन्दर्यका वर्णन और पक्षियों द्वारा रामकी स्तुति | २५७ | गुणवतीका अयोध्यामें रामके सम्मुख पहुँचना, रामकी तत्कालीन शोभाका वर्णन | २८४ |
| तृतीय सर्ग | गुणवतीको रामका वरदान मिलना | २८५ | |
| सीतासे प्रश्न करनेपर रामका देहरामायण-वर्णन | २६१ | पिंगला नागकी वेश्याका रामके समक्ष पहुँचना, राम द्वारा पिंगलाका वृत्तान्त सुनकर सीताका कुपित होना | २८६ |
| अपने दिये हुए ज्ञानके विषयमें रामका प्रश्न और सीताका उत्तर | २६३ | क्रोधवश सीताका मरनेके लिए उद्यत होना, रामकी विकलता, आधी रातके समय रामका गुरु वसिष्ठको बुलानेके लिए लक्ष्मणको भेजना, गुरुके चरण छूकर रामका शपथ खाना | २८८ |
| चतुर्थ सर्ग | सवेरे सीताका पिंगला वेश्याको बुलाकर डांटना और मारना, पिंगलाको सीताका शाप और उससे उद्धारका समय निर्धारित करना | २८९ | |
| रामकी दिनचर्या और बन्दीजनोंकी स्तुति | २६६ | नवम सर्ग | |
| सीताके अगणित अलंकारोंका वर्णन | २६८ | रामकी कुरुक्षेत्रयात्रा, लोपामुद्रा और जानकीजीकी बातचीत | २८९ |
| पञ्चम सर्ग | लोपामुद्रासे शास्त्रार्थमें सीताकी विजय | २९० | |
| राम-सीताका जलविहार | २७२ | विलासकाण्डका माहात्म्य एवं विलासकाण्डके पाठकी विधि | २९१ |
| षष्ठ सर्ग | —:o:— <br> जन्मकाण्ड <br> प्रथम सर्ग | ||
| राम-सीताके शयनका वर्णन, राम-सीताका विहार | २७६ | धात्रीके मुखसे रामका सीताके गर्भिणी होनेका समाचार सुनना | २९३ |
| राम और सीताका एक छज्परसे बाजारके कौतुक देखना, सीताका एक दीन-हीन ब्राह्मणीको अपना दरबा लिये भीख मांगनेपर उद्यत देखना, सीताका उसके उससे दरिद्रताका कारण पूछना और उसका बताना, सीताका उस ब्राह्मणीको एक लाख स्वर्णमुद्रा दिलदाना | २७७ | सीताका जंगलोंमें सैर करनेकी इच्छा प्रकट करना और इसकी तैयारीके लिए रामका लक्ष्मणको आदेश देना | २९४ |
| सीताका लक्ष्मणके द्वारा सारे देशमें यह घोषणा करवाना कि कोई भी स्त्री बिना वस्त्राभूषणके दिखलायी न दे। यदि वह धनाभावके कारण वस्त्राभूषण न धारण कर सकती हो तो उसे राज्यसे दिया जाय | २७८ | ||
| भगवान् रामकी तत्कालीन दिनचर्या | २७९ |