भारतकोश
आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

Anandamath with Vande Mataram - Bankim Chandra

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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कल्याणी--“छोटे-छोटे धर्मों मे। बड़े धर्मों के अनुसरण मे कण्टक! मैने विष-कटक द्वारा उनके अधर्म या कष्ट का उद्धार किया था। छिः, दुराचारी पामर ब्रह्मचारी! तुमने मेरे प्राण क्यो लौटाये?” भवानन्द--“अच्छा, न तो मैने जो किया है, उसे मुझे वापस कर दो। मैने जो प्राण-दान किया है, क्या तुम उसे वापस कर सकती हो।” कल्याणी--“क्या आपको पता है, मेरी सुकुमारी कैसी है?” भवानन्द--“बहुत दिनो से उसकी खबर नही लगी। जीवानन्द बहुत दिनो से उधर गये ही नही।” कल्याणी--“उसकी खबर क्या मुझे ला नही दे सकते? स्वामी मेरे लिए त्याज्य है; लेकिन जब जिन्दा रह गई हूं तो कन्या को क्यो त्याग दूं! अब तो सुकुमारी के पास जाने से ही जीवन मे कुछ सुख मिल सकता है। लेकिन मेरे लिए इतना आप क्यो करेगे।” भवानन्द--“करूंगा कल्याणी! तुम्हारे लिए कन्या ला दूंगा; लेकिन इसके बाद?” कल्याणी--“इसके बाद क्या गोस्वामी?” भवानन्द--“स्वामी” कल्याणी--“उन्हे तो इच्छापूर्वक त्यागा है।” भवानन्द--“यदि उनका व्रत पूर्ण हो जाए तो?” कल्याणी--“तो मै उनकी हूंगी। मै जो बच गई हूं, क्या वे यह जानते है?” भवानन्द--“नही।” कल्याणी--“आपसे क्या उनकी मुलाकात नही होती?” भवानन्द--“होती है।” कल्याणी--“मेरी बात कभी नही करते?” भवानन्द--“नही! जो स्त्री मर गयी, उससे फिर पति का क्या सम्बन्ध!” कल्याणी--“क्या कहा?” भवानन्द--“तुम फिर विवाह कर सकती हो, तुम्हारे पुनर्जन्म हुआ है।” कल्याणी--“मेरी कन्या ला दो!” भवानन्द--“ला दूंगा! तुम फिर विवाह कर सकती हो?” कल्याणी--“तुम्हारे साथ न?” भवानन्द--“विवाह करोगी?” कल्याणी--“तुम्हारे साथ” भवानन्द--“यही मान लो।” कल्याणी--“सन्तान धर्म कहां रहेगा?” भवानन्द--“अतल जल मे।” कल्याणी--“यह तुम्हारा महाव्रत है?” भवानन्द--“अतल जल मे गया?” कल्याणी--“किसलिए सब अतल जल मे डुबाते हो?” भवानन्द--“तुम्हारे लिए! देखो, मनुष्य हो, ऋषि हो, सिद्ध हो, देवता हो, सबका चित्त अवश्य होता है। सन्तान-धर्म मेरा प्राण है, लेकिन आज पहले-पहल करता हूं, तुम प्राणो से भी बढ़कर प्राण हो। जिस दिन तुम्हे प्राण-दान किया, उसी दिन से मै तुम्हारे पैरो पर गिर गया। मै नही जानता था कि संसार मे ऐसा रूप भी