अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
आरती
आरति करहुँ संत सद्गुरु की, सद्गुरु सत्यनाम दिनकर की। काम, क्रोध मद, लोभ नसावन, मोह रहित करि सुरसरि पावन। हरहिं पाप कलिलमल की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
तुम पारस संगति पारस तब, कलिलमल ग्रसित लौह प्राणी भव। कंचन करहिं सुधर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
भुलेहुँ जो जिव संगति आवें, कर्म भर्म तेहि बाँधि न पावें। भय न रहे यम घर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
योग अग्नि प्रगटहिं तिनके घट, गगन चढ़े श्रुति खुले वज्रपट। दर्शन हों हरिहर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
सहस्र कैवल चढ़ि त्रिकुटी आवें, शून्य शिखर चढ़ि बीन बजावें। खुले द्वार सतघर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
अलख अगम का दर्शन पावें, पुरुष अनामी जाय समावें। सद्गुरु देव अमर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...
एक आस विश्वास तुम्हारा, पड़ा द्वार मैं सब विधि हारा। जय, जय, जय गुरुवर की, आरति करहुँ संत सद्गुरु की ॥ सद्गुरु...