अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| आमाजीर्ण के लक्षण | १३९ | द्रव्य-वर्णन की समाप्ति | १४८ |
| विष्टद्र्धाजीर्ण के लक्षण | १३९ | रसवर्णन-प्रस्ताव | १४८ |
| विद्र्धाजीर्ण के लक्षण | १३९ | द्रव्यगत वीर्य-वर्णन | १४८ |
| चिकित्सासूत्र | १३९ | चरकसम्मत वीर्य | १४८ |
| विलम्बिका के लक्षण | १३९ | वाग्भट का मत | १४८ |
| रसशेषाजीर्ण-चिकित्सा | १४० | रस आदि में वीर्य की श्रेष्ठता | १४८ |
| अजीर्ण का सामान्य लक्षण | १४० | वीर्य सम्बन्धी अन्य मत | १४८ |
| अजीर्ण के विविध कारण | १४० | वाग्भट का समर्थन | १४८ |
| समशन आदि के लक्षण | १४० | वीर्य के लक्षण | १४९ |
| शास्त्रीय भोजन-विधि | १४१ | विपाक का वर्णन | १४९ |
| त्याज्य भोजन-विधि | १४१ | विपाकज रस-क्षेद | १४९ |
| असेवनीय आहार | १४१ | रस, वीर्य, विपाक, प्रभाव | १४९ |
| सेवनीय आहार | १४२ | द्रव्य का स्वाभाविक बल | १५० |
| रात में सेवनीय पदार्थ | १४२ | रस आदि का स्वाभाविक बल | १५० |
| अन्य पदार्थों को खाने की विधि | १४२ | प्रभाव का वर्णन | १५० |
| आमाशय के चार भाग | १४२ | द्रव्य आदि के कर्म | १५० |
| विभिन्न प्रकार के अनुपान | १४२ | भिन्नता के उदाहरण | १५० |
| उत्तम अनुपान | १४३ | ( १० ) रसभेदीयाध्यायः | |
| अनुपान-सेवन का फल | १४३ | मधुर आदि रसों की उत्पत्ति | १५२ |
| १. अनुपान का निषेध | १४३ | मधुररस के लक्षण | १५२ |
| २. अनुपान का निषेध | १४३ | अम्लरस के लक्षण | १५२ |
| ३. अनुपान का निषेध | १४३ | लवणरस के लक्षण | १५३ |
| भोजन-समय का निर्देश | १४४ | तिक्तरस के लक्षण | १५३ |
| ( ९ ) द्रव्यादिविज्ञानीयाध्यायः | कटुरस के लक्षण | १५३ | |
| द्रव्य की प्रधानता | १४५ | कषायरस के लक्षण | १५३ |
| द्रव्य का स्वरूप | १४५ | रसों के स्वरूप | १५३ |
| द्रव्य की उत्पत्ति | १४५ | रसों के कर्म | १५३ |
| उत्पत्ति के कारण | १४५ | मधुररस के कर्म | १५३ |
| नामकरण में कारण | १४५ | अम्लरस के कर्म | १५३ |
| द्रव्य में अनेक रस | १४६ | लवणरस के कर्म | १५४ |
| अनेक दोषज रोग | १४६ | तिक्तरस के कर्म | १५४ |
| द्रव्यगत गुरु आदि गुण | १४६ | कटुरस के कर्म | १५४ |
| पार्थिव द्रव्य का वर्णन | १४६ | कषायरस के कर्म | १५४ |
| आयु द्रव्य का वर्णन | १४६ | मधुरस्कन्ध के द्रव्य | १५५ |
| आग्नेय द्रव्य का वर्णन | १४७ | अम्लस्कन्ध के द्रव्य | १५५ |
| वायव्य द्रव्य का वर्णन | १४७ | लवणस्कन्ध के द्रव्य | १५५ |
| नाभस द्रव्य का वर्णन | १४७ | तिक्तस्कन्ध के द्रव्य | १५५ |
| औषधमय द्रव्य | १४७ | कटुस्कन्ध के द्रव्य | १५५ |
| द्रव्यों की विशेषता | १४७ | कषायस्कन्ध के द्रव्य | १५६ |