अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ
पृष्ठ 25, कुल 387 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 25
( २५ )
| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| मधुररस का विशिष्ट वर्णन | १५६ | स्वेदक्षय के लक्षण | १६४ |
| अम्लरस का विशिष्ट वर्णन | १५६ | अन्य मलों के क्षय-लक्षण | १६४ |
| लवणरस का विशिष्ट वर्णन | १५६ | वृद्धि एवं क्षय-निर्देश | १६५ |
| तिक्त एवं कटु रसों का विशिष्ट वर्णन | १५६ | पुरीष आदि मलों का महत्त्व | १६५ |
| कषायरस का विशिष्ट वर्णन | १५६ | वात आदि के विशिष्ट स्थान | १६५ |
| रसों का वर्णन | १५६ | वातज रोग प्रतीकार | १६५ |
| रसों के ६३ भेद | १५७ | वृद्धरक्तादि की चिकित्सा | १६५ |
| रससंयोगों के असंख्य भेद | १५८ | मलों की वृद्धि एवं क्षय की चिकित्सा | १६६ |
| ( ११ ) दोषादिविज्ञानीयाध्यायः | |||
| शरीर के आधार | १६० | धातुओं की वृद्धि-क्षय | १६६ |
| प्रकृतिस्य दोषों के कर्म | १६० | वृद्धि-क्षय का कारण | १६६ |
| रस आदि धातुओं के कर्म | १६० | वृद्धि-क्षय का अन्य स्वरूप | १६७ |
| मलों के प्रमुख कर्म | १६१ | दोष, धातु, मल एवं स्रोतों की दुष्टि | १६७ |
| वातवृद्धि के लक्षण | १६१ | मलायनों का परिचय | १६७ |
| पित्तवृद्धि के लक्षण | १६१ | ओजस् का वर्णन | १६७ |
| कफवृद्धि के लक्षण | १६१ | ओजःक्षय के कारण, लक्षण एवं चिकित्सा | १६७ |
| रक्तवृद्धि के लक्षण | १६१ | ओजोवृद्धि के लक्षण | १६८ |
| मांसवृद्धि के लक्षण | १६२ | वृद्धि-क्षय का चिकित्सासूत्र | १६८ |
| मेदोवृद्धि के लक्षण | १६२ | द्वेष एवं प्रार्थना का कारण | १६८ |
| अस्थिवृद्धि के लक्षण | १६२ | अवस्थानुसार दोषों के कर्म | १६८ |
| मज्जावृद्धि के लक्षण | १६२ | दोषों को सम रखना | १६९ |
| शुक्रवृद्धि के लक्षण | १६२ | ( १२ ) दोषभेदोपाध्यायः | |
| पुरीषवृद्धि के लक्षण | १६२ | वात के प्रमुख स्थान | १७० |
| मूत्रवृद्धि के लक्षण | १६३ | पित्त के प्रमुख स्थान | १७० |
| स्वेदवृद्धि के लक्षण | १६३ | कफ के प्रमुख स्थान | १७१ |
| अन्य मलवृद्धि के लक्षण | १६३ | वात के पाँच भेद | १७१ |
| वातदोष के क्षय-लक्षण | १६३ | पाँच वातों का वर्णन | १७१ |
| पित्तदोष के क्षय-लक्षण | १६३ | उदानवायु का वर्णन | १७१ |
| कफदोष के क्षय-लक्षण | १६३ | व्यानवायु का वर्णन | १७१ |
| रसधातु के क्षय-लक्षण | १६३ | समानवायु का वर्णन | १७१ |
| रक्तधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | अपानवायु का वर्णन | १७२ |
| मांसधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | पित्त के पाँच भेद | १७२ |
| मेदोधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | पाचकपित्त का वर्णन | १७२ |
| अस्थिधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | रञ्जकपित्त का वर्णन | १७२ |
| मज्जाधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | साधकपित्त का वर्णन | १७२ |
| शुक्रधातु के क्षय-लक्षण | १६४ | आलोचकपित्त का वर्णन | १७२ |
| पुरीषक्षय के क्षय-लक्षण | १६४ | भ्राजकपित्त का वर्णन | १७३ |
| मूत्रक्षय के क्षय-लक्षण | १६४ | कफ का वर्णन | १७३ |
| अवलम्बक कफ का वर्णन | १७३ | ||
| वलेदक कफ का वर्णन | १७३ |