अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| अज्ञनों की त्रिविध कल्पना | २६५ | यन्त्रों की विविधता | २७५ |
| अज्ञनों की मात्रा | २६५ | स्वस्तिकयन्त्र-परिचय | २७५ |
| तीक्ष्ण अज्ञनों की मात्रा | २६५ | सन्दशयन्त्र-परिचय | २७५ |
| अज्ञनप्रयोग-निर्देश | २६६ | सन्दशयन्त्र के भेद | २७५ |
| अन्य आचार्यों का मत | २६६ | मुजुण्डायन्त्र का वर्णन | २७५ |
| तीक्ष्णाज्ञन का रात्रिप्रयोग | २६६ | ताल्ययन्त्र-परिचय | २७६ |
| उष्णकाल में तीक्ष्णाज्ञन-निषेध | २६६ | नाडीयन्त्र-परिचय | २७६ |
| लौह एवं नेत्र की समानता | २६६ | कण्ठशल्यावलोकनी नाड़ी | २७६ |
| तीक्ष्ण अज्ञन का निषेध | २६६ | द्विकर्ण, चतुष्कर्ण नाडीयन्त्र | २७६ |
| अज्ञन के अयोग्य व्यक्ति | २६७ | विविध नाडीयन्त्र | २७६ |
| निषिद्ध अज्ञन का वर्णन | २६७ | शल्यनिर्घातनी नाड़ी | २७७ |
| अज्ञन-प्रयोगविधि | २६७ | अशौयन्त्र-परिचय | २७७ |
| नेत्रप्रक्षालन-विधि | २६७ | शमीयन्त्र-परिचय | २७७ |
| नेत्रशोधन-विधि | २६७ | भगन्दर-यन्त्र | २७७ |
| नेत्रशोधन में हेतु | २६७ | घ्राणयन्त्र-परिचय | २७७ |
| तीक्ष्णाज्ञन या धूमपान | २६८ | अंगुलित्राणक यन्त्र | २७७ |
| प्रत्यञ्जन का वर्णन | २६८ | योनिव्रणेश्मण यन्त्र | २७८ |
| ( २४ ) तर्पणपुटपाकविधिरध्यायः | नाडीव्रण के यन्त्र | २७८ | |
| तर्पणविधि-वर्णन | २६९ | नाडीयन्त्र | २७८ |
| तर्पण की दूसरी विधि | २६९ | अन्य अनेक यन्त्र | २७८ |
| स्नेह-धारणकाल | २७० | भृंगानाडीयन्त्र | २७८ |
| तर्पण का पश्चात् कर्म | २७० | तुम्बीयन्त्र-परिचय | २७९ |
| दोषानुसार तर्पण | २७० | घटीयन्त्र-परिचय | २७९ |
| तर्पण के विविध योग | २७० | शलाकायन्त्र | २७९ |
| पुटपाक का वर्णन | २७१ | एषणी शलाका | २७९ |
| दोषानुसार पुटपाक-प्रयोग | २७१ | स्रोतःशल्यहारिणी शलाका | २७९ |
| स्नेहन पुटपाक के द्रव्य | २७१ | छः शंकुयन्त्र | २८० |
| लेखन पुटपाक के द्रव्य | २७१ | व्युहन शंकुयन्त्र | २८० |
| प्रसादन पुटपाक के द्रव्य | २७१ | चालन शंकुयन्त्र | २८० |
| पुटपाक-रचनाविधि | २७२ | आहार्य शंकुयन्त्र | २८० |
| धारणकाल-अवधि | २७२ | गर्भशंकुयन्त्र | २८० |
| उष्णशीत-प्रयोगभेद | २७२ | अश्मरीहरण यन्त्र | २८० |
| पश्चात्-कर्म | २७२ | दन्तपातन यन्त्र | २८० |
| योगों का निर्देश | २७२ | प्रमार्जनी शलाकायन्त्र | २८० |
| तर्पण एवं पुटपाक का निषेध | २७२ | पायुयन्त्र | २८० |
| तर्पण एवं पुटपाक की अवधि | २७२ | घ्राण एवं कर्णयन्त्र | २८१ |
| नेत्ररक्षा की आवश्यकता | २७३ | कर्णशोधन-यन्त्र | २८१ |
| ( २५ ) यन्त्रविधिरध्यायः | विविध शलाकायन्त्र | २८१ | |
| यन्त्रों का वर्णन | २७४ | अनुयन्त्रों का वर्णन | २८१ |