अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| यन्त्रों के विविध कर्म | २८२ | जौक रखने एवं लगाने की विधि | २९० |
| कंकमुख यन्त्र | २८२ | दुष्टरक्तग्रहण-दुष्टान्त | २९० |
| ( २६ ) शस्त्रविधिरध्यायः | जौक छड़ाने की स्थिति | २९० | |
| शस्त्रों का वर्णन | २८३ | जौक का उपचार | २९१ |
| मण्डलमशस्त्र | २८४ | रक्तमद से रक्षा | २९१ |
| वृद्धिपत्रशस्त्र | २८४ | रक्तवमन का सम्यग्योग | २९१ |
| उत्पल, अर्धघंटाकर शस्त्र | २८४ | रक्तवमन का अतियोग | २९१ |
| सर्पवक्त्र-शस्त्र | २८४ | रक्तवमन का मिथ्यायोग | २९१ |
| १. एषणी-शस्त्र | २८४ | जलौका-पालनविधि | २९१ |
| २. एषणी-शस्त्र | २८४ | जलौकावचारण का पश्चात् कर्म | २९१ |
| वेतस-शस्त्र | २८५ | रक्तावरोधक उपचार | २९१ |
| शरारिमुख, त्रिकूर्चक शस्त्र | २८५ | रक्तघ्रावण का फल | २९२ |
| कुशपत्रक एवं आटामुख शस्त्र | २८५ | पुनः रक्तघ्रावण | २९२ |
| अन्तर्मुख-शस्त्र | २८५ | अलाबूयन्त्र निषिद्ध | २९२ |
| ब्रीहिमुख-शस्त्र | २८५ | अलाबूयन्त्रप्रयोग विहित | २९२ |
| कुठारी-शस्त्र | २८५ | शृंगयन्त्रप्रयोग-निषेध | २९२ |
| ताम्रशलाका-शस्त्र | २८५ | शृंगयन्त्रप्रयोग-निर्देश | २९२ |
| अंगुली-शस्त्र | २८६ | प्रच्छानकर्म-निर्देश | २९२ |
| बडिशा-शस्त्र | २८६ | प्रच्छान आदि का विकल्प | २९२ |
| करपत्र-शस्त्र | २८६ | जलौका-प्रयोग | २९२ |
| कर्तरी-शस्त्र | २८६ | तुम्बी एवं शृंगी यन्त्र | २९३ |
| नख-शस्त्र | २८६ | सिरावेध-प्रयोग | २९३ |
| दन्तलेखनक-शस्त्र | २८६ | रक्तघ्रावण-विधिविकल्प | २९३ |
| सूचीशस्त्र | २८६ | रक्तघ्रावण में उपद्रव एवं शान्ति | २९३ |
| कूर्च-शस्त्र | २८७ | ( २७ ) सिराव्यधविधिरध्यायः | |
| खजशस्त्र | २८७ | शुद्धरक्त का वर्णन | २९४ |
| मृथिका-शस्त्र | २८७ | रक्तदूषक तत्त्व | २९४ |
| आराशस्त्र | २८७ | रक्तज रोग | २९५ |
| कर्णबिधनी सूची | २८७ | सिरावेध का निर्देश | २९५ |
| अनुशस्त्रों का परिगणन | २८८ | सिरावेध-विधि | २९५ |
| शस्त्रकर्मों का वर्णन | २८८ | रोगविशेष में सिरावेध | २९५ |
| शस्त्रों के आठ दोष | २८८ | कर्णरोग में सिरावेध | २९५ |
| शस्त्रग्रहण-विधि | २८८ | नासारोग में सिरावेध | २९६ |
| शस्त्रकोष का विस्तार | २८९ | पीनसरोग में सिरावेध | २९६ |
| जौकों का प्रयोग | २८९ | मुखरोग में सिरावेध | २९६ |
| त्याज्य जौकों का वर्णन | २८९ | जत्रुध्वंरोगों में सिरावेध | २९६ |
| त्याज्य जौकों का निषेध | २८९ | उन्मादरोग में सिरावेध | २९६ |
| गह्म जौकों का वर्णन | २९० | अपस्माररोग में सिरावेध | २९६ |
| त्याज्य जौकों के लक्षण | २९० | विद्रधि एवं पाश्चर्वशूल में सिरावेध | २९६ |
३ अ० भू०