अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| तृतीयकज्वर में सिरावेध | २९६ | पुनः सिरावेध | ३०२ |
| चतुर्थकज्वर में सिरावेध | २९६ | अधिक रक्तघ्राव का निषेध | ३०२ |
| प्रवाहिकारोग में सिरावेध | २९६ | भृंगयन्त्र का प्रयोग | ३०२ |
| शुक्र एवं शिशुनरोगों में सिरावेध | २९८ | रक्तशुद्धि के उपाय | ३०२ |
| गलगण्डरोग में सिरावेध | २९७ | स्तम्भनक्रिया-निर्देश | ३०२ |
| गुग्घसीरोग में सिरावेध | २९७ | रक्तस्सम्भन-उपचार | ३०२ |
| अपचीरोग में सिरावेध | २९७ | रक्तघ्रावण का पश्चात् कर्म | ३०२ |
| प्रमुख वातरोगों में सिरावेध | २९७ | रक्तघ्रावण में पथ्य | ३०३ |
| पादवाह आदि में सिरावेध | २९७ | रक्तशुद्धि के लक्षण | ३०३ |
| विश्वनाचीरोग में सिरावेध | २९७ | ( २८ ) शल्याहरणविधिर्ध्यायः | |
| अन्यत्र सिरावेध-निर्देश | २९७ | शल्य की गतिर्था | ३०४ |
| सिरायन्त्रण-विधि | २९७ | अन्तःशल्य के लक्षण | ३०४ |
| सिरावेधन-विधि | २९८ | त्वचागत शल्य के लक्षण | ३०४ |
| कुठारिका-प्रयोग | २९८ | मांसगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| उपनासिका-सिरावेध | २९८ | पेशीगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| जिह्वासिरावेध | २९८ | स्नायुगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| ग्रीवासिरावेध | २९८ | सिरागत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| बाहुसिरावेध | २९९ | स्रोतोगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| पाशर्वस्थ सिरावेध | २९९ | धमनीगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| लिंग का सिरावेध | २९९ | अस्थिसन्धिगत शल्य के लक्षण | ३०५ |
| जंघासिरावेध | २९९ | अस्थिगत शल्य के लक्षण | ३०६ |
| पादसिरावेध | २९९ | सन्धिगत शल्य के लक्षण | ३०६ |
| सिरावेध-निर्देश | २९९ | कोष्ठगत शल्य के लक्षण | ३०६ |
| वेध का परिमाण | २९९ | मर्मागत शल्य के लक्षण | ३०६ |
| सम्यक् वेध का वर्णन | २९९ | सामान्य निर्देश | ३०६ |
| दुर्बेध आदि का वर्णन | २९९ | शल्यव्रण का रोपण | ३०६ |
| रक्त न बहने के कारण | ३०० | पुनः पीड़ाकर्तृत्व | ३०६ |
| रक्तघ्रावण के उपाय | ३०० | शल्यज्ञान के उपाय | ३०७ |
| रक्तघ्राव-वर्णन | ३०० | मांसगत शल्य | ३०७ |
| घ्रावण-उपायों का निषेध | ३०० | पेशी आदिगत शल्य | ३०७ |
| मूच्छ्छा में कर्तव्य | ३०० | अस्थिगत शल्य | ३०७ |
| वातदूषित रक्त के लक्षण | ३०० | सन्धिगत शल्य | ३०७ |
| पित्तदूषित रक्त के लक्षण | ३०१ | स्नायु आदिगत शल्य | ३०७ |
| कफदूषित रक्त के लक्षण | ३०१ | मर्मागत शल्य | ३०७ |
| द्वन्द्वज रक्त के लक्षण | ३०१ | सामान्य निर्देश | ३०७ |
| त्रिदोषज रक्त के लक्षण | ३०१ | शल्य के स्वरूपों का अनुमान | ३०७ |
| सिरावेध में रक्त का परिमाण | ३०१ | शल्यनिर्हरण के उपाय | ३०८ |
| विविध चिकित्सा | ३०१ | अर्वाचीन आदि शल्य | ३०८ |
| उपचार-विधि | ३०१ | तिर्यग्गत शल्य | ३०८ |