भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 387 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 34

( ३४ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
तृतीयकज्वर में सिरावेध२९६पुनः सिरावेध३०२
चतुर्थकज्वर में सिरावेध२९६अधिक रक्तघ्राव का निषेध३०२
प्रवाहिकारोग में सिरावेध२९६भृंगयन्त्र का प्रयोग३०२
शुक्र एवं शिशुनरोगों में सिरावेध२९८रक्तशुद्धि के उपाय३०२
गलगण्डरोग में सिरावेध२९७स्तम्भनक्रिया-निर्देश३०२
गुग्घसीरोग में सिरावेध२९७रक्तस्सम्भन-उपचार३०२
अपचीरोग में सिरावेध२९७रक्तघ्रावण का पश्चात् कर्म३०२
प्रमुख वातरोगों में सिरावेध२९७रक्तघ्रावण में पथ्य३०३
पादवाह आदि में सिरावेध२९७रक्तशुद्धि के लक्षण३०३
विश्वनाचीरोग में सिरावेध२९७( २८ ) शल्याहरणविधिर्ध्यायः
अन्यत्र सिरावेध-निर्देश२९७शल्य की गतिर्था३०४
सिरायन्त्रण-विधि२९७अन्तःशल्य के लक्षण३०४
सिरावेधन-विधि२९८त्वचागत शल्य के लक्षण३०४
कुठारिका-प्रयोग२९८मांसगत शल्य के लक्षण३०५
उपनासिका-सिरावेध२९८पेशीगत शल्य के लक्षण३०५
जिह्वासिरावेध२९८स्नायुगत शल्य के लक्षण३०५
ग्रीवासिरावेध२९८सिरागत शल्य के लक्षण३०५
बाहुसिरावेध२९९स्रोतोगत शल्य के लक्षण३०५
पाशर्वस्थ सिरावेध२९९धमनीगत शल्य के लक्षण३०५
लिंग का सिरावेध२९९अस्थिसन्धिगत शल्य के लक्षण३०५
जंघासिरावेध२९९अस्थिगत शल्य के लक्षण३०६
पादसिरावेध२९९सन्धिगत शल्य के लक्षण३०६
सिरावेध-निर्देश२९९कोष्ठगत शल्य के लक्षण३०६
वेध का परिमाण२९९मर्मागत शल्य के लक्षण३०६
सम्यक् वेध का वर्णन२९९सामान्य निर्देश३०६
दुर्बेध आदि का वर्णन२९९शल्यव्रण का रोपण३०६
रक्त न बहने के कारण३००पुनः पीड़ाकर्तृत्व३०६
रक्तघ्रावण के उपाय३००शल्यज्ञान के उपाय३०७
रक्तघ्राव-वर्णन३००मांसगत शल्य३०७
घ्रावण-उपायों का निषेध३००पेशी आदिगत शल्य३०७
मूच्छ्छा में कर्तव्य३००अस्थिगत शल्य३०७
वातदूषित रक्त के लक्षण३००सन्धिगत शल्य३०७
पित्तदूषित रक्त के लक्षण३०१स्नायु आदिगत शल्य३०७
कफदूषित रक्त के लक्षण३०१मर्मागत शल्य३०७
द्वन्द्वज रक्त के लक्षण३०१सामान्य निर्देश३०७
त्रिदोषज रक्त के लक्षण३०१शल्य के स्वरूपों का अनुमान३०७
सिरावेध में रक्त का परिमाण३०१शल्यनिर्हरण के उपाय३०८
विविध चिकित्सा३०१अर्वाचीन आदि शल्य३०८
उपचार-विधि३०१तिर्यग्गत शल्य३०८