अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
श्रीमद्वाग्भट द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)
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विषय
निर्घातन के अयोग्य शल्य विशाल्यन्त शल्याहरण-निषेध शल्यनिर्हरण-विधि दृश्यशल्यनिर्हरण अदृश्यशल्यनिर्हरण संदेशवन्त्र-प्रयोग तालयन्त्र-प्रयोग नाडीयन्त्र-प्रयोग शेषयन्त्र-प्रयोग निर्हुत शल्य का पश्चात्कर्म सिरा, स्नायुगत शल्य हृदयगत शल्य शल्याहरण की अन्य विधि अस्थिगत शल्य दूसरी विधि तीसरी विधि चौथी विधि पाँचवीं विधि छठी विधि सातवीं विधि आठवीं विधि नवीं विधि दसवीं विधि पक्वाशयगत शल्य वात आदि शल्य कण्ठस्रोतोगत शल्य जतुशल्यनिर्हरण अन्य शल्यनिर्हरण गले में फँसे हुए शल्य को निकालना आँख एवं व्रण में पड़े शल्य को निकालना उदरगत जल निकालने की विधि कर्णगत जल एवं क्रिमि निकालने की विधि शरीर में शल्य का विलयन विलीन न होने वाले शल्य शल्यनिर्हरणोपाय शल्यनिर्हरण-निर्देश
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विषय
आमशोथ के लक्षण पच्यमान व्रणशोथ के लक्षण पक्वशोथ के लक्षण व्रण में वात आदि के लक्षण अतिपक्व व्रण के लक्षण गम्भीर पाक का वर्णन दारण एवं पाटन लेप शस्त्रकर्म का निषेध शस्त्रकर्म का विधान अनिश्चितकारी वैद्य की निन्दा शस्त्रकर्म के पूर्वकर्म आहार एवं मरुपापन का निषेध शस्त्रप्रयोग-विधि महान् व्रणशोथ में कर्तव्य प्रशस्त शल्यचिकित्सक तिर्यक्छेदन-विधि पश्चात्कर्म-निर्देश पट्टी आदि का निर्देश व्रणरक्षा-विधान औषधधारण-निर्देश आचार-निर्देश दिन में सोने का निषेध अन्य निषिद्ध कर्म व्रणरोगी का आहार लाभ एवं हानि त्याज्य आहार व्रणोपचारार्थ उपदेश पुनः प्रशालन आदि कर्म विकेशिका-वर्णन इनके दुष्परिणाम विकेशिका का सद्उपयोग विरुद्धव्रण का उपचार सद्योव्रण के उपचार सीवनकर्म का निषेध सीवनकर्म-विधि सीवन का पश्चात् कर्म सीवनकर्म का निर्देश बन्धनद्रव्यों का वर्णन बन्धनभेदों का निर्देश
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( २९ ) शस्त्रकर्मविधिरध्यायः
व्रण के उपचार व्रणशोथ-चिकित्सा
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