भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

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विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
पुनः बन्धभेद-निर्देश३२४दुर्दग्ध के लक्षण३३२
ब्रणबन्धन आवश्यक३२५पुनः क्षार-प्रयोग३३२
ब्रणबन्धन से लाभ३२५अतिदग्ध के लक्षण३३२
पवदान-उपक्रम३२५अतिदग्ध गुद के लक्षण३३२
ब्रणबन्धन का निषेध३२६अतिदग्ध नासा के लक्षण३३२
ब्रणज क्रिमियों का वर्णन३२६श्रोत्रादि दग्ध के लक्षण३३२
रोपण में शीघ्रता का निषेध३२६क्षार का शमन कर्म३३३
रोपण के पश्चात् कर्म३२७क्षारप्रयोग से हानि-लाभ३३३
चिकित्सा-निर्देश३२७अश्विकर्म की प्रधानता३३३
( ३० ) क्षाराश्विकर्मविधिरध्यायःअश्विकर्म का प्रयोग३३३
क्षार-प्रशंसा३२८त्वचारोगों में अश्विकर्म३३३
पानीयक्षार-प्रयोग३२८मांसरोगों में अश्विकर्म३३३
अन्यत्र क्षार-प्रयोग३२८सिरादि रोगों में अश्विकर्म३३४
क्षारप्रयोग का निषेध३२९अश्विकर्म का निषेध३३४
मध्यम क्षारनिर्माण की विधि३२९सम्यग्दग्ध का पश्चात् कर्म३३४
क्षारगालन-विधि३३०सम्यग्दग्ध का लक्षण३३४
मुदु क्षार बनाने की विधि३३०दुर्दग्ध आदि के लक्षण३३४
तीक्ष्ण क्षार बनाने की विधि३३०अग्निदग्ध के भेद३३४
तीक्ष्ण, मध्य, मुदु क्षारों के प्रयोग३३०तुच्छ(त्य) दग्ध के लक्षण३३४
क्षार के १० गुण३३०दुर्दग्ध के लक्षण३३५
क्षार का सम्यक् योग३३१अतिदग्ध के लक्षण३३५
क्षारप्रयोग की विधि३३१अग्निदग्ध की चिकित्सा३३५
अशोर् पर क्षार-प्रयोग३३१दुर्दग्ध की चिकित्सा३३५
वर्त्मरोगों पर क्षार-प्रयोग३३१सम्यग्दग्ध-चिकित्सा३३५
नासाशर्ष पर क्षार-प्रयोग३३१अतिदग्ध-चिकित्सा३३५
कर्णाशर्ष पर क्षार-प्रयोग३३१स्नेहदग्ध-चिकित्सा३३५
क्षार का पश्चात् कर्म३३१शस्त्र आदि का प्रयोग३३५
क्षारदग्ध ब्रण का रोपण३३२विविध सूत्रों का वर्णन३३६
सम्यग्दग्ध के लक्षण३३२