अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1030, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअमन्महीदनाशवो ऽ नुग्रासश्च वृत्रहन्. सकृत् सु ते महता शूर राधसा ऽ नु स्तोमं मुदीमहि.. (२) हे वृत्रहंता इंद्र! हम तुम्हारी वृद्धि के द्वारा सुखी हों तथा अपने को नाश से रहित मानें. (२) सूक्त-११७ देवता—इंद्र पिबा सोममिन्द्र मन्दतु त्वा यं ते सुषाव हर्यश्वाद्रिः. सोतुर्बाहुभ्यां सुयतो नार्वा.. (१) हे इंद्र! हम जिस सोमरस को पत्थरों के द्वारा संस्कारित करते हैं, वह तुम्हें तृप्त करे. इस का संस्कार करने वाले के हाथ में पत्थर है. हे इंद्र! तुम इस सोमरस का पान करो. (१) यस्ते मदो युज्यश्चारुरस्ति येन वृत्राणि हर्यश्व हंसि. स त्वामिन्द्र प्रभूवसो ममत्तु.. (२) हे हरि नाम वाले घोड़ों के स्वामी एवं समृद्धि प्रदान करने वाले इंद्र देव! जिस सोमरस से प्राप्त हुए उत्साह के द्वारा आप असुरों का वध करते हैं, वह सोमरस आप को अत्यधिक मादकता प्रदान करे. (२) बोधा सु मे मघवन् वाचमेमां यां ते वसिष्ठो अर्चति प्रशस्तिम्. इमा ब्रह्म सधमादे जुषस्व.. (३) हे इंद्र! जिस प्रशंसा की वसिष्ठ पूजा करते हैं, उस मंत्र समूह वाली मेरी वाणी को यश के साथ स्वीकार करो. (३) सूक्त-११८ देवता—इंद्र शग्ध्यू ३ षु शचीपत इन्द्र विश्वाभिरूतिभिः. भगं न हि त्वा यशसं वसुविद्मनु शूर चरामसि.. (१) हे इंद्र! मैं यह चाहता हूं कि मैं तुम्हारे सभी रक्षा साधनों के द्वारा यश और सौभाग्य प्राप्त करने के हेतु तुम्हारा अनुयायी बनूं. (१) पौरो अश्वस्य पुरुकृद् गवामस्युत्सो देव हिरण्ययः. नकिर्हि दानं परिमर्धिषत् त्वे यद्यद्यामि तदा भर.. (२) हे इंद्र! तुम नगरवासियों के लिए अश्व के समान हो तथा धन को अपरिमित बनाते हो. तुम गायों की वृद्धि करने वाले तथा स्वर्ण से पूर्ण और मनचाहा दान देने वाले हो. मैं जिन ebook converter DEMO Watermarks*